प्रदेश के लिए विशेष वित्तीय प्रावधानों की जरूरत पर जोर- उप-मुख्यमंत्री

हिमाचल न्यूज़ डेली (Himachal News Daily)
शिमला, 22 मार्च,2025 । शिमला में आयोजित तीन दिवसीय संगोष्ठी श्रृंखला ‘समृद्ध हिमाचल 2045’ के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां अन्य राज्यों से अलग हैं, जिससे इसे आत्मनिर्भर बनने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों को विशेष वित्तीय सहायता दी जाए ताकि यहां की विकास परियोजनाओं को सुचारु रूप से संचालित किया जा सके।
विकास और संसाधनों पर विचार
मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि हिमाचल में आय के सीमित साधन हैं और इसे बड़े राज्यों जैसे दिल्ली, राजस्थान और महाराष्ट्र के बराबर नहीं आंका जा सकता। उन्होंने कहा कि राज्य में जल, वन और हिमनदों जैसे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किया जा रहा है, जो देश के पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद हिमाचल को इससे होने वाले वित्तीय नुकसान की भरपाई नहीं होती है।
हक की लड़ाई और न्यायिक संघर्ष
उप-मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2011 में सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल के पक्ष में निर्णय दिया था, लेकिन अब तक चंडीगढ़ में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी प्राप्त नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि हिमाचल को अपने जल संसाधनों का उचित हक पाने के लिए न्यायालय में भी लड़ाई लड़नी पड़ रही है।
हिमाचल की शिक्षा और स्वास्थ्य में प्रगति
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि राज्य में एआईआईएमएस, पीजीआई, एनआईटी, आईआईएम और आईआईटी जैसे बड़े शिक्षण और स्वास्थ्य संस्थान हैं, जो हिमाचल की विकास यात्रा को दर्शाते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस संगोष्ठी से हिमाचल को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के लिए कारगर सुझाव मिलेंगे।
भविष्य की योजना और विकास का दृष्टिकोण
‘समृद्ध हिमाचल 2045’ के तहत, राज्य की 20 वर्षीय योजना तैयार करने के लिए विभिन्न सुझावों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम के दौरान प्राप्त सुझावों को राज्य सरकार विकास के एजेंडे में शामिल करेगी।
उन्होंने कहा, “हिमाचल के लोग मेहनतकश और ईमानदार हैं। यदि उन्हें सही अवसर मिलें तो वे निश्चित रूप से बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।”