डॉ. राजेश्वर सिंह चंदेल की कुलपति पद पर नियुक्ति को लेकर हिमाचल युवा कांग्रेस ने उठाए सवाल!
सतर्कता जांच की मांग!

*राजीव भवन, शिमला | 4 अप्रैल 2025: हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस (HPYC) ने डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौनी, सोलन (हि.प्र.) के कुलपति डॉ. राजेश्वर सिंह चंदेल की नियुक्ति को “अवैध” बताते हुए उनकी तत्काल बर्खास्तगी और सतर्कता जांच की मांग की है। यह मांग आज शिमला स्थित राजीव भवन में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में की गई, जिसमें HPYC के प्रदेश अध्यक्ष छतर सिंह ठाकुर, राज्य महासचिव डॉ. रंजीत सिंह वर्मा और शिमला युवा कांग्रेस महासचिव तुषार सिंह स्तान शामिल हुए।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए ठाकुर ने डॉ. चंदेल की नियुक्ति को विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 24 का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि चयन समिति में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक की अनिवार्य उपस्थिति नहीं थी, जो कि कानूनी रूप से आवश्यक है। उन्होंने इस संदर्भ में हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर की हालिया नियुक्ति को रद्द करने वाले उच्च न्यायालय के फैसले का भी हवाला दिया।
डॉ. रंजीत सिंह वर्मा ने आरोप लगाया कि डॉ. चंदेल का कार्यकाल 8 मई, 2025 को समाप्त हो रहा है, लेकिन अब तक नए कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। उन्होंने मांग की कि डॉ. चंदेल से नैतिक आधार पर इस्तीफा लिया जाए या राज्यपाल द्वारा उन्हें हटाया जाए। साथ ही, नए कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध ढंग से पूर्ण किया जाए।
प्रेस वार्ता में डॉ. वर्मा ने डॉ. चंदेल के कार्यकाल के दौरान वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं को भी उजागर किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में विश्वविद्यालय के लिए 40 लाख रुपये की किआ कार्निवल वाहन खरीदी गई, जिसकी अनुमति राज्य सरकार के वित्त विभाग से नहीं ली गई। यह राशि नेरी कॉलेज, हमीरपुर के छात्रों की फीस से ली गई, जबकि छात्र मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, कुलपति और शोध निदेशक के आवासों पर लगभग 80 लाख रुपये खर्च किए गए, जिसमें केवल कुलपति के आवास पर ही 70 लाख रुपये के महंगे इंटीरियर व फर्नीचर शामिल हैं। यह खर्च मूल लागत 25 लाख रुपये से कई गुना अधिक है।
उन्होंने यह भी बताया कि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय से प्रतिनियुक्ति पर लाए गए शोध निदेशक डॉ. संजीव चौहान की नियुक्ति अवधि समाप्त होने के बावजूद वे अभी तक पद पर बने हुए हैं। इसी प्रकार, विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. इंदर देव सहित दोनों को अगस्त 2022 से जुलाई 2024 के बीच 1.67 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जिसे बचाया जा सकता था।
एक अन्य अनियमितता के अंतर्गत डॉ. वर्मा ने बताया कि गुजरात स्थित एक कंपनी को बिना औपचारिक प्रक्रिया के 8.72 लाख रुपये का भुगतान किया गया, जिसमें जीएसटी के तौर पर 1.33 लाख रुपये भी शामिल थे। स्थानीय लेखा परीक्षा विभाग ने इस भुगतान पर आपत्ति जताई है।
डॉ. चंदेल पर आरएसएस से जुड़ी संस्थाओं के सहयोग से दिसंबर 2022 में आयोजित एक सम्मेलन में विश्वविद्यालय संसाधनों के दुरुपयोग का भी आरोप लगा। इसके अतिरिक्त, उनके द्वारा प्राकृतिक खेती परियोजना में किसानों की संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करने का आरोप भी लगाया गया।
HPYC ने मांग की है कि इस पूरे मामले की सतर्कता जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और कुलपति का प्रभार वरिष्ठतम प्रोफेसर को सौंपा जाए। साथ ही, संगठन राज्यपाल और मुख्यमंत्री को इस संबंध में ज्ञापन भी सौंपेगा।