कर्मचारियों के हक में बड़ा फैसला: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने DA को माना ‘संवैधानिक अधिकार’
हिमाचल सरकार पर बढ़ा दबाव; डॉ. मामराज पुंडीर बोले— "डीए कोई खैरात नहीं, कर्मचारियों का कानूनी हक है"

VIDYA SAGAR
[शिमला/सिरमौर • 11 मई, 2026] मुख्य समाचार: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक ऐतिहासिक निर्णय ने देशभर के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के पक्ष में एक नई उम्मीद जगा दी है। माननीय न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ की पीठ ने स्पष्ट आदेश दिया है कि महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) सरकार द्वारा दी जाने वाली कोई दया या अनुग्रह राशि नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों का वैधानिक और संवैधानिक अधिकार है।
सरकार वित्तीय संकट का बहाना नहीं बना सकती अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पूर्व प्रांत महामंत्री डॉ. मामराज पुंडीर ने इस फैसले का पुरजोर स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकारें ‘खजाने के खाली होने’ या ‘वित्तीय तंगी’ का हवाला देकर कर्मचारियों के जायज हक को नहीं दबा सकतीं। फैसला (CWP-7291-2026) यह नज़ीर पेश करता है कि केंद्र सरकार के पैटर्न पर डीए देना अब सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
हिमाचल के कर्मचारियों की स्थिति गंभीर हिमाचल प्रदेश के वर्तमान हालातों पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. पुंडीर ने बताया कि:
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प्रदेश के कर्मचारियों को केंद्र की तुलना में 15% कम डीए मिल रहा है।
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जनवरी 2022 से लंबित वेतन एरियर का भुगतान अभी तक अधर में लटका है।
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अनुमान के मुताबिक, प्रत्येक कर्मचारी की औसतन 15 लाख रुपये से अधिक की देनदारी सरकार पर बकाया है।
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विलंब के कारण कर्मचारियों को हर माह लगभग 15 हजार रुपये का आर्थिक नुकसान हो रहा है।
OPS के नाम पर गुमराह करने का आरोप डॉ. पुंडीर ने प्रदेश सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि एक तरफ पुरानी पेंशन (OPS) बहाली का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ कर्मचारियों को अपने खून-पसीने की कमाई और एरियर के लिए अदालतों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तुरंत लंबित डीए और एरियर जारी नहीं किया, तो कर्मचारियों का असंतोष उग्र रूप ले सकता है।
प्रमुख मांगें:
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केंद्र सरकार के अनुरूप समस्त लंबित डीए/डीआर तुरंत जारी हो।
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जनवरी 2022 से बकाया वेतन एरियर का एकमुश्त भुगतान किया जाए।
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कर्मचारियों के अन्य वित्तीय लाभों पर लगी रोक हटाई जाए।



