शिक्षाहिमाचल न्यूज

एईडीपी विद्यार्थियों को उद्योग का अनुभव और रोजगार के नए अवसर प्रदान करेंगे: शिक्षा मंत्री

उच्च शिक्षा विभाग ने अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम के लिए बीओएटी-एनआर के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

Advertisement

10 सितम्बर, 2026

(Viren Thakur)

अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम्स (एईडीपी) को शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 16 राजकीय महाविद्यालयों में लागू करने के लिए प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने आज बोर्ड ऑफ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग (उत्तरी क्षेत्र), कानपुर (बीओएटी-एनआर) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस समझौता ज्ञापन पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की उपस्थिति में बीओएटी-एनआर के निदेशक विवेक कुमार तथा 16 महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों के मध्य हस्ताक्षर किए गए।

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य कक्षा में दी जाने वाली शिक्षा और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच के अंतर को कम करना है। इसके तहत विद्यार्थियों को मान्यता प्राप्त स्नातक डिग्री के साथ-साथ वास्तविक कार्यस्थल का व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने पर विशेष बल दे रही है।

उन्होंने कहा कि एईडीपी के तहत विद्यार्थी बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं एवं बीमा, लॉजिस्टिक्स तथा रिटेल ऑपरेशंस मैनेजमेंट जैसे उद्योग-केंद्रित डिग्री कार्यक्रमों में अध्ययन करेंगे। इन कार्यक्रमों में शैक्षणिक अध्ययन के साथ उद्योग में कम से कम छह महीने की अनिवार्य प्रक्षिक्षुता (अप्रेंटिसशिप) शामिल होगी। विद्यार्थियों को प्रति माह न्यूनतम 10,900 रुपये का सुनिश्चित स्टाइपेंड प्रदान किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव प्राप्त करने और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकसित करने का अवसर प्राप्त होगा।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि एईडीपी के तहत पांच पाठ्यक्रमों को लागू करने की मंजूरी दी गई है। पहले चरण में 16 राजकीय महाविद्यालयों में तीन कार्यक्रम शुरू किए गए हैंकृ इनमें बी.कॉम. बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं एवं बीमा, बी.कॉम. रिटेल ऑपरेशंस मैनेजमेंट तथा बी.कॉम. लॉजिस्टिक्स। इनमें से बी.कॉम. बीएफएसआई का संचालन 11 महाविद्यालयों, बी.कॉम. रिटेल ऑपरेशंस मैनेजमेंट का दो महाविद्यालयों तथा बी.कॉम. लॉजिस्टिक्स का तीन महाविद्यालयों में किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि बीओएटी-एनआर के साथ किया गया समझौता ज्ञापन उद्योगों के साथ संबंधों को और मजबूत करेगा तथा विद्यार्थियों के लिए अप्रेंटिसशिप के अवसर उपलब्ध करवाने में मदद करेगा। इससे विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को लाभ प्राप्त होगा, क्योंकि उन्हें कार्यस्थल का अनुभव, उद्योग से संबंधित कौशल और बेहतर रोजगार की संभावनाएं प्राप्त होंगी।

Advertisement

कार्यक्रम के पहले वर्ष में 16 राजकीय महाविद्यालयों में एईडीपी शुरू किए गए हैं और तीनों कार्यक्रमों में कुल 685 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। आने वाले वर्षों में और अधिक विद्यार्थियों को इन कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा। इस पहल को उद्योगों के साथ संपर्क, अप्रेंटिसशिप के अवसर, प्रशिक्षण तथा प्लेसमेंट सहायता के लिए महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, बीओएटी-एनआर और सीआरआईएसपी के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।

रोहित ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बाद देश का तीसरा राज्य है, जहां इस तरह के अप्रेंटिसशिप-आधारित डिग्री कार्यक्रम लागू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि एईडीपी को विद्यार्थियों से मिल रही उत्साहजनक प्रतिक्रिया से विभाग को आने वाले वर्षों में इन कार्यक्रमों का विस्तार और अधिक महाविद्यालयों तक करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध करवाने के लिए बी.ए और बी.एस.सी जैसे अन्य स्नातक पाठ्यक्रमों में भी अप्रेंटिसशिप-आधारित कार्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य में 21 राजकीय महाविद्यालयों में रिटेल मैनेजमेंट तथा टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी में बी.वीओसी कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में बेहतर प्लेसमेंट परिणामों को देखते हुए सरकार ने इनका विस्तार 25 और महाविद्यालयों तक करने का निर्णय लिया है। हिमाचल प्रदेश के विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में रोजगार प्राप्त हुआ है, जो कौशल आधारित उच्च शिक्षा की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए कई सुधार कर रही है। इन सुधारों का उद्देश्य शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार, कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करना तथा विद्यार्थियों के लिए बेहतर अवसर सृजित करना है। इन पहलों से राज्य को विभिन्न क्षेत्रों में पहचान भी मिली है और ये प्रयास हिमाचल प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य बनाने के लक्ष्य की दिशा में योगदान दे रहे हैं।

शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह समझौता ज्ञापन विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव, उद्योग-केंद्रित कौशल और रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध करवा कर उनके लिए नए रास्ते खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र में गुणात्मक सुधार लाने और विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए कई प्रगतिशील कदम उठा रही है।

इस अवसर पर शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य तथा बीओएटी-एनआर के पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

 

Advertisement

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button