आरक्षण व्यवस्था पर मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) जी.डी. बख्शी का बयान: बोले—’इस विषय पर देश में व्यापक बहस की जरूरत’
सदियों पुराने सामाजिक शोषण के आधार पर अनिश्चितकाल तक आरक्षण जारी रखने की नीति पर पुनर्विचार की वकालत; शिक्षा और योग्यता आधारित व्यवस्था पर भी रखी राय

27-July-2026/ नई दिल्ली:
भारतीय सेना के सेवानिवृत्त मेजर जनरल जी.डी. बख्शी ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में देश की आरक्षण व्यवस्था को लेकर अपनी व्यक्तिगत राय व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर भावनात्मक नहीं, बल्कि तथ्यों और तर्कों के आधार पर गंभीर राष्ट्रीय चर्चा होनी चाहिए।
इंटरव्यू के दौरान जी.डी. बख्शी ने कहा, “700 साल पहले शोषण हुआ, तो अगले 7,000 या 70,000 साल मुझे रिजर्वेशन दो! This is nonsense!” उनके अनुसार, सदियों पुराने सामाजिक शोषण के आधार पर अनिश्चितकाल तक आरक्षण जारी रखने की नीति पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि देश को ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है, जो सभी वर्गों को समान अवसर प्रदान करे और योग्यता के आधार पर आगे बढ़ने का वातावरण तैयार करे। उनका मानना है कि आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर सभी पक्षों को साथ लेकर खुली और रचनात्मक बहस होनी चाहिए।
हालांकि, आरक्षण का विषय भारत में संवैधानिक और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। संविधान के तहत अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण व्यवस्था सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करने तथा समान अवसर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की गई है। इस विषय पर समय-समय पर विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों की अलग-अलग राय सामने आती रही है।
जी.डी. बख्शी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ लोग उनके विचारों का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कई अन्य लोगों ने इससे असहमति जताते हुए आरक्षण को सामाजिक न्याय का महत्वपूर्ण माध्यम बताया है।
(नोट: यह समाचार जी.डी. बख्शी द्वारा दिए गए सार्वजनिक बयान पर आधारित है। उनके विचार उनके व्यक्तिगत मत हैं। इस विषय पर विभिन्न पक्षों की अलग-अलग राय हो सकती है।)




