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सीएम सुक्खू का बड़ा कदम: पंजाब के राज्यपाल के समक्ष उठाए हिमाचल के हक के मुद्दे; चंडीगढ़ में 7.19% हिस्सेदारी और शानन प्रोजेक्ट पर जताया दावा

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से की मुलाकात; चंडीगढ़ में नया हिमाचल सदन बनाने और बीबीएमबी के बकाये को लेकर की विस्तृत चर्चा।

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VIDYA SAGAR

चंडीगढ़/शिमला, 27 जून:

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने पड़ोसी राज्य पंजाब और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ से जुड़े हिमाचल प्रदेश के कई दशकों से लंबित और अत्यंत महत्वपूर्ण विधिक मामलों को प्रमुखता से उठाया तथा सहकारी संघवाद की भावना के तहत इनके शीघ्र समाधान का आग्रह किया।



चंडीगढ़ में हिमाचल के 7.19% वैधानिक हक का दावा

मुख्यमंत्री ने केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में हिमाचल प्रदेश के वैध 7.19 प्रतिशत हिस्से के दावे को दृढ़ता से दोहराया। उन्होंने कहा:

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  • पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के प्रावधानों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश तत्कालीन अविभाजित पंजाब का उत्तराधिकारी राज्य है।

  • राज्य को हस्तांतरित क्षेत्रों की जनसंख्या के अनुपात में चंडीगढ़ में हिस्सेदारी प्राप्त करने का पूरा विधिक अधिकार है।

  • पिछले पांच दशकों से पंजाब और हरियाणा इस शहर की भूमि, परिसंपत्तियों और प्रशासनिक व्यवस्था का लाभ उठा रहे हैं, जबकि हिमाचल अब तक अपने इस हक से वंचित है।

सेक्टर-52 में बनेगा नया ‘हिमाचल सदन’

चंडीगढ़ में उच्च शिक्षा, प्रशासनिक कार्यों और विशेष रूप से पीजीआई (PGI) में इलाज के लिए आने वाले हिमाचल के मरीजों और छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मुख्यमंत्री ने एक और अतिरिक्त हिमाचल सदन के निर्माण का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि पुराना हिमाचल भवन अब आवश्यकताओं के लिए छोटा पड़ रहा है। इसके लिए चंडीगढ़ प्रशासन के साथ विचार-विमर्श के बाद सेक्टर-52 में 4.736 एकड़ भूमि चिन्हित की जा चुकी है, जिसे जल्द अलॉट करने का आग्रह किया गया।

बीबीएमबी (BBMB) से 13,066 मिलियन यूनिट बिजली का बकाया

मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) से संबंधित लंबे समय से लंबित देयों के शीघ्र निपटारे का विषय भी राज्यपाल के समक्ष रखा। उन्होंने याद दिलाया कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी हिमाचल प्रदेश के बीबीएमबी परियोजनाओं में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी के अधिकार को मान्यता दी है। राज्य पिछले एक दशक से अधिक समय से 13,066 मिलियन यूनिट बिजली तथा उससे संबंधित वित्तीय देयों की प्राप्ति का इंतजार कर रहा है।



“शानन प्रोजेक्ट पर पंजाब का दावा विधिक रूप से निराधार”

शानन जलविद्युत परियोजना पर हिमाचल का कड़ा रुख स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मंडी रियासत कभी भी संयुक्त पंजाब का हिस्सा नहीं रही और इसका विलय 1948 में भारतीय संघ में हुआ था।



“शानन जलविद्युत परियोजना के संबंध में 99 वर्ष की लीज 2 मार्च, 2024 को समाप्त हो चुकी है। लीज की अवधि समाप्त होने के साथ ही पंजाब के सभी अधिकार स्वतः समाप्त हो गए हैं। ऐसे में समाप्त हो चुकी लीज के आधार पर परियोजना के संचालन, प्रबंधन अथवा कब्जे का पंजाब का कोई भी दावा कानूनी दृष्टि से पूरी तरह निराधार है।” — ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि इन सभी लंबित और संवेदनशील मुद्दों का समाधान रचनात्मक संवाद, पारस्परिक सम्मान तथा सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप जल्द ही निकाल लिया जाएगा।

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