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शिमला: केएनएच बचाने के लिए जनवादी महिला समिति का ‘महापड़ाव’, 24 घंटे के धरने पर बैठीं महिलाएं

सरकार के ओपीडी शिफ्टिंग फैसले को बताया महिला विरोधी; मांग पूरी न होने पर सचिवालय घेराव की दी चेतावनी।

23/04/2026-VIDYA SAGAR

शिमला: अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) से गायनी ओपीडी को आईजीएमसी (इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज) में शिफ्ट करने के सरकार के फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समिति ने आज से केएनएच परिसर में २४ घंटे का धरना शुरू कर दिया है।

सरकार का फैसला महिला विरोधी:

समिति का आरोप है कि केएनएच से गायनी ओपीडी को आईजीएमसी शिफ्ट करना सरासर महिला विरोधी फैसला है। समिति का कहना है कि केएनएच राज्य का एकमात्र समर्पित मातृ एवं शिशु अस्पताल है, जहाँ पूरे प्रदेश से महिलाएँ इलाज के लिए आती हैं। गायनी मरीज़ों को विशेष देखभाल और धूप की ज़रूरत होती है, जो केएनएच में उपलब्ध है।

आईजीएमसी में शिफ्ट करने से परेशानियाँ:

समिति का तर्क है कि आईजीएमसी में पहले से ही बहुत भीड़ रहती है, क्योंकि वहाँ विभिन्न विभागों की ओपीडी चलती हैं और राज्य भर से मरीज़ आते हैं। ऐसे में, गायनी मरीज़ों को वहाँ इलाज कराने में काफी कठिनाई होगी। इसके अलावा, आईजीएमसी में इन्फेक्शन का ख़तरा भी बना रहेगा। समिति का मानना है कि महिलाओं को एक ही छत के नीचे पूरा इलाज़ मिलना चाहिए, जो केएनएच में संभव है।

सरकार से मांग:

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति सरकार से मांग करती है कि कमला नेहरू अस्पताल की गायनी ओपीडी को आईजीएमसी से वापस केएनएच में लाया जाए। समिति का कहना है कि सरकार को केएनएच में ही उचित सुविधाएँ उपलब्ध करानी चाहिए थीं, न कि इसे खत्म करके महिलाओं को परेशानी में डालना चाहिए।

धरना और भविष्य की रणनीति:

समिति ने आज सुबह ११ बजे से केएनएच में २४ घंटे का धरना शुरू किया है, जो कल सुबह ११ बजे समाप्त होगा। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती है, तो ३० अप्रैल को आईजीएमसी में प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बावजूद यदि सरकार नहीं मानती है, तो समिति पूरे राज्य से महिलाओं को लामबंद करते हुए सचिवालय घेराव करने से भी पीछे नहीं हटेगी।

प्रदर्शन में भाग लेने वाली महिलाएँ:

आज के धरने में सोनिया शबरवाल, फ़लमा चौहान, रमा रावत, हिम्मी ठाकुर, रंजना जैरेट, सुनिधि, दिव्या शर्मा, शारदा शर्मा, पलक शांडिल, दीपा, डॉली, माला, सावित्री और भी कई महिलाओं ने भाग लिया।

निष्कर्ष:

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति का यह धरना सरकार के लिए एक चेतावनी है। सरकार को महिलाओं के स्वास्थ्य और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि वह तब तक संघर्ष जारी रखेगी जब तक कि सरकार उचित फैसला नहीं लेती।

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