डिजिटल सुशासन की नई मिसाल: ‘हिम परिवार’ पहल ने बदली प्रशासन की तस्वीर
एकीकृत डेटा प्लेटफॉर्म से पारदर्शिता, दक्षता और समावेशी विकास को मिला नया आयाम

19 अप्रैल, 2026-VIDYA SAGAR
डिजिटल युग में सुशासन का आधार तेजी से विश्वसनीय और समेकित आंकड़ों पर निर्भर होता जा रहा है। इसी दिशा में हिमाचल प्रदेश सरकार की ‘हिम परिवार’ पहल एक अभिनव और प्रभावशाली कदम के रूप में उभरी है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में शुरू की गई यह योजना पारंपरिक और बिखरी हुई सेवा प्रणाली से आगे बढ़ते हुए एकीकृत, डेटा-आधारित शासन मॉडल की स्थापना करती है।
वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट में घोषित इस पहल का उद्देश्य राज्य के प्रत्येक परिवार और नागरिक की सामाजिक-आर्थिक जानकारी को एक ही डिजिटल मंच पर लाना था। आज ‘हिम परिवार’ एक सशक्त राज्य सामाजिक रजिस्ट्री बन चुका है, जिसमें 19.25 लाख परिवार और 75.92 लाख से अधिक नागरिक शामिल हैं। यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक दक्षता को दर्शाती है, बल्कि सटीक आंकड़ों पर आधारित नीति निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव भी है।

इस पहल के केंद्र में ‘हिम एक्सेस’ एकल साइन-ऑन (SSO) प्लेटफॉर्म है, जिसने नागरिकों और सरकारी कर्मचारियों के लिए सेवाओं तक पहुंच को बेहद सरल बना दिया है। अब एक ही लॉगिन के माध्यम से विभिन्न सरकारी सेवाओं का लाभ लिया जा सकता है। वर्तमान में 7.2 लाख से अधिक उपयोगकर्ता और लगभग 46,000 सरकारी कर्मचारी इस प्रणाली से जुड़े हुए हैं।
‘हिम परिवार’ के अंतर्गत प्रत्येक परिवार और सदस्य को एक विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान की गई है, जिससे लाभार्थियों की सही पहचान और पात्रता का सत्यापन सुनिश्चित हुआ है। इससे न केवल दस्तावेज़ी प्रक्रिया आसान हुई है, बल्कि योजनाओं का लाभ भी तेजी से और सटीक रूप से लोगों तक पहुंच रहा है।
इस पहल की एक और प्रमुख विशेषता इसका मजबूत डेटा सत्यापन तंत्र है। मोबाइल आधारित सर्वेक्षण और रियल-टाइम अपडेट के माध्यम से आंकड़ों को लगातार अद्यतन किया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं में हजारों अपात्र लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें हटाया गया है, जिससे राज्य को लगभग 5 करोड़ रुपये प्रति माह की बचत हो रही है।

विभिन्न विभागों के बीच डेटा एकीकरण ने इस प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया है। बिजली कनेक्शन, भूमि अभिलेख, शहरी परिवारों के आंकड़े और अन्य सामाजिक वर्गों की जानकारी को जोड़कर एक व्यापक और सटीक डेटाबेस तैयार किया गया है। इसके अतिरिक्त, इस पहल को जन्म-मृत्यु पंजीकरण प्रणाली, डिजिलॉकर और भारत सरकार के ‘माई स्कीम’ पोर्टल से भी जोड़ा गया है, जिससे पात्र लाभार्थियों की स्वतः पहचान संभव हो सकी है।
‘हिम परिवार’ केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण का एक मजबूत आधार है। इससे सरकार को योजनाओं की बेहतर योजना और क्रियान्वयन में सहायता मिल रही है। साथ ही, डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के मानकों का पालन करते हुए नागरिकों की जानकारी की सुरक्षा भी सुनिश्चित की गई है।
अंततः, ‘हिम परिवार’ पहल यह सिद्ध करती है कि सही दिशा में उपयोग किए गए आंकड़े केवल सूचना नहीं, बल्कि पारदर्शिता, दक्षता और समावेशी विकास के मजबूत स्तंभ बन सकते हैं। यह पहल हिमाचल प्रदेश को एक आधुनिक, उत्तरदायी और भविष्य उन्मुख शासन व्यवस्था की ओर अग्रसर कर रही है।

