हिमाचल में ‘सहारा’ का संकट
जीवित व्यक्तियों को मृत बताकर पेंशन रोकना 'सुख की सरकार' की बेशर्मी – जयराम ठाकुर

24/04/2026-VIDYA SAGAR
शिमला | हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने ‘सहारा पेंशन योजना’ के लाभार्थियों को मृत घोषित कर उनकी पेंशन रोकने के मामले को सरकार की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा करार दिया है। ठाकुर ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन का नारा देने वाली “सुख की सरकार” अब प्रदेश की जनता के लिए “शुल्क की सरकार” बन चुकी है।
“जीवितों को मृत घोषित करना शर्मनाक”
जयराम ठाकुर ने एक प्रेस वक्तव्य में कहा कि भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई ‘सहारा पेंशन योजना’ का उद्देश्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे और शारीरिक रूप से पूर्णतया अक्षम लोगों को आर्थिक संबल देना था। प्रदेश के 30,000 से अधिक लाभार्थी इस योजना पर निर्भर हैं, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे लगभग ठप कर दिया है।
“यह सरकार की बेशर्मी है कि पेंशन की राशि बचाने के लिए जीवित लोगों को कागजों में मृत घोषित किया जा रहा है। जो व्यक्ति बिस्तर से उठ नहीं सकता, वह खुद को जीवित साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर कैसे लगाएगा?” — जयराम ठाकुर
सोशल मीडिया पर सामने आई ‘कुटिल चाल’
नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि हाल ही में उन्होंने फेसबुक के माध्यम से इस योजना के बारे में फीडबैक मांगा था, जिसमें सैकड़ों लोगों ने अपनी पीड़ा साझा की। कई लाभार्थियों ने बताया कि उन्हें बिना किसी सूचना के मृत घोषित कर पिछले कई महीनों से उनकी पेंशन रोक दी गई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विधानसभा में योजना सुचारू होने का दावा करते हैं, जबकि जमीनी हकीकत इसके उलट है।
अस्पताल से सर्किट हाउस तक: “शुल्क की सरकार” का तांडव
ठाकुर ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि प्रदेश में विज्ञापनों पर करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं, जबकि आम जनता पर भारी शुल्क थोपा जा रहा है। उन्होंने निम्नलिखित सेवाओं में हुई वृद्धि पर चिंता जताई:
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स्वास्थ्य सेवाएँ: अस्पतालों में बेड, अल्ट्रासाउंड, ईसीजी, आईसीयू और मेजर ऑपरेशन के शुल्कों में बेतहाशा वृद्धि।
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दैनिक सुविधाएँ: मरीजों को मिलने वाली रोटी से लेकर मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट तक सब महंगा।
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पर्यटन व विश्राम गृह: सर्किट हाउस और पर्यटन निगम के होटलों के किराए में वृद्धि।
जयराम ठाकुर की प्रमुख माँगें:
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स्वयं सत्यापन: सरकार ‘बर्डन ऑफ प्रूफ’ लाचार मरीजों पर न डाले, बल्कि सरकारी कर्मचारी स्वयं जाकर लाभार्थियों का भौतिक सत्यापन करें।
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बकाया भुगतान: जिन पात्र लोगों की पेंशन रोकी गई है, उन्हें तुरंत एरियर सहित भुगतान किया जाए।
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संवेदनशीलता: इस मानवीय मामले को कुटिल राजनीति के बजाय संवेदनशीलता से संभाला जाए।
निष्कर्ष: विपक्ष ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने सहारा पेंशनधारकों और आम जनता पर थोपे गए “अन्यायपूर्ण शुल्कों” को वापस नहीं लिया, तो इसके विरुद्ध जन आंदोलन छेड़ा जाएगा। प्रदेश की जनता अब “सुख” नहीं, बल्कि “सहारा” और “राहत” की तलाश में है।



