कानपुर: ‘पापा जीत गए, उन्हें जीत मुबारक’, सुसाइड नोट लिख प्रशिक्षु वकील ने कचहरी की 5वीं मंजिल से लगाई छलांग
पिता की डांट और अपमान से टूटे प्रियांशु की आखिरी इच्छा- 'पिता मेरा शव भी न छू पाएं, ऐसे पिता भगवान किसी को न दे'

कानपुर 24/04/2026 | उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ कचहरी परिसर की पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर एक प्रशिक्षु अधिवक्ता (ट्रेनी वकील) ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। मृतक की पहचान प्रियांशु श्रीवास्तव के रूप में हुई है। जान देने से पहले प्रियांशु ने दो पन्नों का एक भावुक सुसाइड नोट छोड़ा है, जिसमें उन्होंने अपने पिता के प्रति गहरा आक्रोश और दर्द व्यक्त किया है।
‘ऐसे पिता भगवान किसी को न मिले’: सुसाइड नोट में छलका दर्द
प्रियांशु ने अपने सुसाइड नोट की शुरुआत एक अंतिम इच्छा के साथ की है कि “जो भी इस नोट को देखे, उसे आखिरी तक पढ़े।” सुसाइड नोट के शब्द पिता और पुत्र के बीच के रिश्तों की कड़वाहट और उस मानसिक प्रताड़ना को बयां कर रहे हैं, जिससे प्रियांशु लंबे समय से गुजर रहे थे।
नोट में प्रियांशु ने लिखा:
“पिता राजेंद्र कुमार की डांट, उलाहने और निर्वस्त्र कर घर से निकालने की धमकी मुझे जिंदगी भर सालती रही। पिता से रिश्तों में इस कदर दूरी आ गई कि मुझे यह लिखना पड़ रहा है… ऐसे पिता भगवान किसी को भी न मिले।”
‘पापा जीत गए, उन्हें जीत मुबारक हो’
भावुक कर देने वाले इस पत्र में प्रियांशु ने अपनी मौत के बाद की एक बड़ी इच्छा भी लिखी है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि “उनके पिता उनके शव को हाथ भी न लगाएं और न ही उसे छुएं।” पत्र के अंत में उन्होंने व्यंग्यात्मक और दुख भरे लहजे में लिखा— “पापा जीत गए, उन्हें जीत मुबारक हो।”
पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुँचा और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने घटनास्थल से बरामद सुसाइड नोट को जांच के लिए जब्त कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि सुसाइड नोट के आधार पर परिवार के सदस्यों और करीबियों से पूछताछ की जाएगी ताकि आत्महत्या के पीछे के सटीक कारणों और परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।
इस घटना ने कानूनी गलियारों और स्थानीय लोगों को स्तब्ध कर दिया है, साथ ही यह समाज में पिता-पुत्र के जटिल रिश्तों और मानसिक स्वास्थ्य पर एक गंभीर सवाल भी खड़ा करती है।



