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हिमाचल में हरित क्रांति

RGVSY के तहत 4,000 हेक्टेयर में पौधरोपण का लक्ष्य, 15,000 महिलाओं को मिलेगा रोजगार

26/04/2026-VIDYA SAGAR

मुख्यमंत्री सुक्खू का बड़ा विजन: वनीकरण से सशक्त होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था; 1,100 सामुदायिक समूहों को जोड़ने की तैयारी।


शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को स्वरोजगार से जोड़ते हुए एक बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राजीव गांधी वन संवर्धन योजना (RGVSY) के तहत आगामी वर्ष 2026-27 के लिए 4,000 हेक्टेयर भूमि पर पौधरोपण का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता महिलाओं की भागीदारी है, जिससे प्रदेश की लगभग 15,000 महिलाओं को सीधे तौर पर रोजगार मिलने की संभावना है।

सामुदायिक भागीदारी: महिलाएं बनेंगी हरित रक्षक

सरकार ने इस अभियान को पूरी तरह से सामुदायिक भागीदारी पर केंद्रित किया है। योजना के तहत कुल 1,100 समूहों को शामिल किया जाएगा, जिसमें भागीदारी का वर्गीकरण इस प्रकार है:

  • 60% महिला समूह (सर्वाधिक प्राथमिकता)

  • 20% युवा समूह

  • 20% अन्य स्वयं सहायता समूह (SHGs)

बजट और प्रोत्साहन राशि का विवरण

राज्य सरकार ने इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए 55 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। समूहों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने के लिए वित्तीय ढांचे को आकर्षक बनाया गया है:

मद विवरण
प्रति हेक्टेयर भुगतान ₹1.20 लाख
रोपण क्षमता 2 से 5 हेक्टेयर प्रति समूह
सफलता पर बोनस 50% से अधिक पौधे जीवित रहने पर ₹1 लाख (हर 2 हेक्टेयर पर)

“हमारी सरकार हरित आवरण को बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण समुदायों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर पैदा करने के लिए प्रतिबद्ध है। हरे पेड़ों के कटान पर प्रतिबंध और वनीकरण में जन-भागीदारी से राज्य के वन क्षेत्र में निरंतर विस्तार हो रहा है।”

ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश

पर्यावरण और आजीविका का संगम

पिछले वर्ष के सफल परिणामों को देखते हुए सरकार ने इस साल लक्ष्यों को और विस्तार दिया है। पिछले वर्ष लगभग 1,100 हेक्टेयर भूमि पर 300 महिला और 70 युवा समूहों ने पौधरोपण किया था। इस योजना के तहत न केवल बंजर भूमि पर फलदार और उपयोगी पौधे लगाए जा रहे हैं, बल्कि उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी इन्हीं समूहों को सौंपी गई है, जिससे जैव विविधता को बढ़ावा मिल रहा है।

यह प्रयास हिमाचल प्रदेश को ‘हरित राज्य’ बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है, जहाँ प्रकृति का संरक्षण और ग्रामीण सशक्तिकरण एक साथ चल रहे हैं।

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