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सिंचाई योजनाओं में तेज़ी

से मांगी ₹60.41 करोड़ की वित्तीय सहायता

28/04/2026-VIDYA SAGAR

नई दिल्ली/शिमला: हिमाचल प्रदेश में कृषि और सिंचाई क्षेत्र को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जल शक्ति विभाग के सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक में हिस्सा लिया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में आयोजित ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ (PMKSY) की इस बैठक में प्रदेश की लंबित परियोजनाओं और भविष्य की कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।


149 योजनाएं पूर्ण, शेष पर काम जारी

सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने बैठक में जानकारी साझा करते हुए बताया कि विभाग द्वारा प्रदेश में कुल 169 सतही लघु सिंचाई योजनाओं का लक्ष्य रखा गया था। इनमें से 149 योजनाएं सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई हैं, जबकि शेष 20 योजनाओं पर काम युद्ध स्तर पर जारी है। सरकार इन परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

आपदा और भौगोलिक चुनौतियां बनीं बाधा

हिमाचल की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए सचिव ने बताया कि:

  • वन क्षेत्र: प्रदेश का 66% हिस्सा वन क्षेत्र में होने के कारण FCA और FRA जैसी अनुमतियों में समय लगता है।

  • प्राकृतिक आपदा: वर्ष 2023 और 2025 की आपदाओं ने बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया। 6 पूर्ण हो चुकी और 6 निर्माणाधीन योजनाएं पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे इनका पुनर्गठन और भूमि अधिग्रहण फिर से करना पड़ा।


लागत मापदंडों में बदलाव का प्रस्ताव

कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में योजनाओं को टिकाऊ बनाने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र के समक्ष एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है:

  1. निर्माण लागत: प्रति हेक्टेयर लागत को 4 लाख रुपये से बढ़ाकर 6 लाख रुपये करने का आग्रह।

  2. बजट की मांग: चल रही योजनाओं के लिए 60.41 करोड़ रुपये और नई परियोजनाओं (MIS) के लिए 273.78 करोड़ रुपये की स्वीकृति का अनुरोध।

  3. समय सीमा: पर्यावरणीय और आपदा संबंधी कारणों से कार्य पूरा करने की डेडलाइन बढ़ाने की मांग।

केंद्रीय मंत्री का आश्वासन: केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने हिमाचल में सिंचाई योजनाओं के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव और पलायन रोकने में इनकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने राज्य की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया है।


प्रमुख बिंदु: एक नज़र में

विवरण वर्तमान स्थिति/मांग
कुल योजनाएं 169 (149 पूर्ण, 20 प्रगति पर)
नई वित्तीय मांग ₹273.78 करोड़ (नए प्रस्ताव)
विशेष सहायता ₹60.41 करोड़ (SMI योजनाओं हेतु)
प्रस्तावित लागत ₹6 लाख प्रति हेक्टेयर

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