अडानी एग्री फ्रेश की हिमाचल में नई पहल: स्टोन फ्रूट बाजार में बड़ा कदम, किसानों से सीधे होगी चेरी की खरीद
सेब के बाद अब चेरी उत्पादकों को मिलेगा संगठित बाजार का लाभ; हिमाचल प्रदेश के किसानों की आर्थिकी को मिलेगी नई रफ्तार

14/05/2026-VIDYA SAGAR
[शिमला]
हिमाचल प्रदेश के कृषि और बागवानी क्षेत्र से एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। देश की प्रमुख कृषि-व्यापार कंपनियों में से एक, अडानी एग्री फ्रेश ने अब स्टोन फ्रूट (गुठली वाले फल) के क्षेत्र में आधिकारिक तौर पर प्रवेश कर लिया है। कंपनी ने अपनी इस नई पहल की शुरुआत हिमाचल प्रदेश से की है, जहां वह सीधे किसानों से चेरी की खरीद करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
किसानों को मिलेगा सीधा और उचित दाम
अडानी एग्री फ्रेश का यह कदम हिमाचल के उन हजारों बागवानों के लिए एक बड़ी राहत है जो चेरी के उत्पादन पर निर्भर हैं। अब तक राज्य में मुख्य रूप से सेब की खरीद करने वाली इस कंपनी के स्टोन फ्रूट बाजार में आने से किसानों को अपनी उपज का अधिक प्रतिस्पर्धी और उचित मूल्य मिलने की उम्मीद है। खरीद प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका कम होने से किसानों का मुनाफा सीधे तौर पर बढ़ेगा और उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए एक नया, पारदर्शी मंच मिलेगा।
कोल्ड चेन और सप्लाई नेटवर्क का मिलेगा फायदा
चेरी एक अत्यधिक संवेदनशील फल है जिसकी शेल्फ लाइफ (ताजा रहने की अवधि) बहुत कम होती है। तुड़ाई के तुरंत बाद इसे सही तापमान पर मंडियों तक पहुंचाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अडानी समूह के पास मौजूद विश्व स्तरीय कोल्ड स्टोरेज और उन्नत सप्लाई चेन नेटवर्क का सीधा फायदा अब चेरी उत्पादकों को मिलेगा। इससे न केवल फल खराब होने से बचेगा, बल्कि देश के बड़े महानगरों तक हिमाचल की चेरी बिल्कुल ताजी स्थिति में पहुंच सकेगी।
बागवानी अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर
यह पहल हिमाचल प्रदेश की ग्रामीण और बागवानी आर्थिकी को एक नई दिशा दे सकती है। सेब अर्थव्यवस्था के बाद अब चेरी, प्लम और आड़ू जैसे गुठली वाले फलों को एक बड़ा और सुरक्षित संगठित बाजार मिलने जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस सीजन में चेरी की खरीद के लिए कंपनी द्वारा जमीनी स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और उत्पादकों के साथ सीधा संपर्क स्थापित किया जा रहा है।
इस रणनीतिक कदम से न केवल स्थानीय किसानों को भारी प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि आने वाले समय में राज्य के बागवानी क्षेत्र में निवेश, तकनीकी विकास और नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।



