तमिलनाडु में सियासी संग्राम: “3 महीने भी नहीं टिकेगी विजय की सरकार”, मुख्यमंत्री स्टालिन का अभिनेता-राजनेता पर बड़ा हमला
स्टालिन की खुली चुनौती: "सियासत फिल्मों जैसी आसान नहीं"

VIDYA SAGAR
चेन्नई | 15 मई, 2026 राजनीतिक डेस्क
तमिलनाडु की राजनीति इस समय एक दिलचस्प मोड़ पर आ खड़ी हुई है। सुपरस्टार से राजनेता बने थलापति विजय की नई पार्टी और उनकी हालिया घोषणाओं ने राज्य के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इसी बीच, मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए विजय की भावी सरकार और उनकी राजनीतिक समझ पर तीखा हमला बोला है, जिससे राज्य में जुबानी जंग तेज हो गई है।
स्टालिन की खुली चुनौती: “सियासत फिल्मों जैसी आसान नहीं”
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के प्रमुख और मुख्यमंत्री स्टालिन ने तंजावुर में आयोजित एक रैली के दौरान विजय का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधा। स्टालिन ने कहा:-
“कुछ लोग सिनेमा के मेकअप और स्क्रिप्टेड डायलॉग्स के साथ सत्ता के सपने देख रहे हैं। लेकिन याद रखें, तमिलनाडु की मिट्टी द्रविड़ विचारधारा से सींची गई है। अगर ऐसी कोई ‘नई सरकार’ बनती भी है, तो मैं चुनौती देता हूँ कि वह 3 महीने भी नहीं टिक पाएगी।”
विजय की पार्टी का पलटवार
विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के समर्थकों ने स्टालिन के इस बयान को ‘डर का प्रतीक’ बताया है। पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री की यह बौखलाहट दर्शाती है कि विजय की बढ़ती लोकप्रियता से सत्ता पक्ष घबरा गया है। विजय ने हाल ही में भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और ‘मक्कल शक्ति’ (जनशक्ति) का नारा दिया था, जिसे युवाओं का भारी समर्थन मिल रहा है।
क्यों गरमाई है राजनीति? मुख्य बिंदु:
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विचारधारा की लड़ाई: एक तरफ स्टालिन का दशकों पुराना द्रविड़ मॉडल है, तो दूसरी तरफ विजय का नया ‘सोशल जस्टिस’ विजन।
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2026 चुनाव की आहट: यह बयानबाजी सीधे तौर पर आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के रूप में देखी जा रही है।
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युवा वोट बैंक: विजय की नजर राज्य के 40% से अधिक युवा मतदाताओं पर है, जो बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं।
विशेष विश्लेषण: क्या वाकई कमजोर है नई सरकार की नींव?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु में एमजीआर (MGR) और जयललिता जैसे सितारों ने राजनीति को बदला है, लेकिन वर्तमान दौर में केवल ‘स्टार पावर’ काफी नहीं है। स्टालिन का ‘3 महीने’ वाला तंज गठबंधन की स्थिरता और प्रशासनिक अनुभव की कमी की ओर इशारा करता है।



