हिमाचल में बन रहा देश का पहला स्वदेशी बायोचार संयंत्र: पर्यावरण संरक्षण के साथ मिलेंगे 28,800 कार्बन क्रेडिट
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने नेरी परियोजना की प्रगति की समीक्षा की; चीड़ की पत्तियों और लैंटाना से बनेगी खाद, किसानों को मिलेंगे नए अवसर

VIDYA SAGAR
शिमला, 30 जून 2026
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हिमाचल प्रदेश को हरित राज्य बनाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम आगे बढ़ाते हुए, प्रदेश सरकार हमीरपुर जिले के नेरी में देश का पहला स्वदेशी बायोचार संयंत्र (Biochar Plant) स्थापित कर रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज शिमला में इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। यह परियोजना न केवल पर्यावरण को सुरक्षित करेगी, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार, आजीविका और आर्थिक समृद्धि के नए द्वार भी खोलेगी।
त्रिपक्षीय समझौते के तहत हो रहा निर्माण
गौरतलब है कि हमीरपुर जिले के नेरी और जाहू में दो बायोचार संयंत्र स्थापित करने के लिए पिछले वर्ष अगस्त माह में एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय समझौता (Tripartite Agreement) हुआ था। यह समझौता डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय (नौणी), वन विभाग और प्रोक्लाइम सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (चेन्नई) के बीच हस्ताक्षरित किया गया था।
परियोजना की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा:-
“यह परियोजना वन संसाधनों के सतत प्रबंधन और राज्य को कार्बन क्रेडिट अर्जित करने में मील का पत्थर साबित होगी। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ राज्य के आर्थिक विकास को भी नई ऊर्जा मिलेगी। सबसे खास बात यह है कि परियोजना के लिए स्थानीय स्तर पर एकत्रित बायोमास की खरीद 2.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की जा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।”

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चीड़ की पत्तियों और लैंटाना का होगा सदुपयोग
इस अनूठे कार्यक्रम के अंतर्गत जंगलों में आग का कारण बनने वाली चीड़ की पत्तियों (पाइन नीडल्स), हानिकारक लैंटाना झाड़ियों, बांस और अन्य पौध-आधारित बायोमास का वैज्ञानिक उपयोग करके बायोचार का उत्पादन किया जाएगा।
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28,800 कार्बन क्रेडिट: परियोजना की 10 वर्ष की परिचालन अवधि में लगभग 28,800 कार्बन क्रेडिट उत्पन्न होने का अनुमान है, जो हिमाचल की ‘हरित पहलों’ (Green Initiatives) को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाएगा।
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50,000 हेक्टेयर में ‘हिम एवरग्रीन’ कार्यक्रम
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में ‘हिम एवरग्रीन इंटीग्रेटेड क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर एंड एग्रो-फॉरेस्ट्री’ कार्यक्रम लागू किया जा रहा है। इसके तहत कृषि प्रणालियों में बड़े पैमाने पर वृक्षों का समावेश किया जाएगा।
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यह कार्यक्रम हिमाचल प्रदेश के 50,000 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में लागू होगा।
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इसके माध्यम से 1.35 करोड़ (13.5 मिलियन) टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन का प्रबंधन किया जाएगा।
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इससे मिट्टी की गुणवत्ता (मृदा स्वास्थ्य) सुधरेगी, जैव विविधता का संरक्षण होगा और किसानों के लिए दीर्घकालिक आय के स्रोत बनेंगे।
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सटीकता के लिए इसमें अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप GIS, रिमोट सेंसिंग और डिजिटल डेटा संग्रह प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है।
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संयुक्त राष्ट्र (UN) के पूर्व निदेशक ने की हिमाचल की तारीफ
इस अवसर पर प्रोक्लाइम के सलाहकार मंडल के सदस्य एवं संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के पूर्व कार्यकारी निदेशक एरिक सोलहाइम भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि हिमाचल सरकार जलवायु संकट से निपटने के लिए बेहद वैज्ञानिक और प्रभावी दृष्टिकोण के साथ काम कर रही है, जो पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है।
इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव सुशील कुमार सिंगला और प्रोक्लाइम के संस्थापक एवं सीईओ केविन कुमार कंदासेमी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।



