राज्यपाल ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर दिल्ली स्थित हिमाचल एम्पोरियम का दौरा किया
देशवासियों से स्थानीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पाद खरीदकर बुनकरों का समर्थन करने का आह्वान

VIDYA SAGAR
नई दिल्ली / शिमला, 7 अगस्त 2026 — हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने शुक्रवार को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित हिमाचल एम्पोरियम का विशेष दौरा किया और वहां प्रदर्शित स्थानीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों की खरीदारी की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश व देश भर के बुनकरों, शिल्पकारों और कलाकारों को बधाई देते हुए देशवासियों से भारत के बुनकरों के समर्थन में कम-से-कम एक हथकरघा उत्पाद खरीदने की अपील की।
प्रमुख बिंदु एवं मुख्य संदेश:
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ऐतिहासिक महत्व: राज्यपाल ने बताया कि 7 अगस्त 1905 को ही स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करना था। यह दिवस हमारे इतिहास और आत्मनिर्भरता के संकल्प की याद दिलाता है।
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‘वोकल फॉर लोकल’ जनआंदोलन: उन्होंने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ पहल केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय जनआंदोलन है। यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, महिलाओं के सशक्तीकरण और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रहा है।
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शिल्पकारों का सशक्तीकरण: राज्यपाल ने कहा कि हथकरघा उत्पाद की हर खरीद हमारी सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा और हजारों शिल्पकार परिवारों की आजीविका में एक महत्वपूर्ण निवेश है।
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हिमाचली कला की सराहना: हिमाचल के प्रतिभाशाली बुनकरों की उत्कृष्ट कारीगरी की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि यहां के उत्पाद प्रदेश की विशिष्ट संस्कृति, कलात्मक उत्कृष्टता और पहचान का प्रतीक हैं।
“स्थानीय उत्पादों की खरीद केवल एक आर्थिक गतिविधि नहीं है, बल्कि इससे शिल्पकार परिवारों का सशक्तीकरण, ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण को मजबूती मिलती है।”

— कविन्द्र गुप्ता, राज्यपाल (हिमाचल प्रदेश)




