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मरीजों की सुविधा के लिए एम्स बिलासपुर तक शुरू की गई सीधी बस सेवा, अन्य क्षेत्र भी जल्द जुड़ेंगेः मुकेश अग्निहोत्री

10 इलेक्ट्रिक बस सेवाओं से एम्स बिलासपुर तक सुगम यात्रा से रोजाना करीब एक हजार यात्री हो रहे लाभान्वित

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26 सितम्बर, 2026

(Viren Thakur)

हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) द्वारा मरीजों और उनके तीमारदारों की सुविधा के लिए विभिन्न क्षेत्रों से एम्स बिलासपुर तक सीधी बस सेवाएं शुरू की गई हैं। उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने आज यहां कहा कि प्रदेश सरकार लोगों को सुगम और बेहतर परिवहन सुविधा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस क्रम में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों को सीधे एम्स बिलासपुर से जोड़ने के लिए 10 इलेक्ट्रिक बस सेवाएं संचालित की जा रही हैं, जिनसे रोजाना एक हजार से अधिक मरीज और उनके परिचारक लाभान्वित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में चिंतपूर्णी, ऊना, हरोली, सोलन, मंडी और जाहू से एम्स बिलासपुर के लिए इलेक्ट्रिक बस सेवाएं संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा बिलासपुर जिले के करलोटी, बंदला, शाहतलाई, घुमारवीं और बिलासपुर से भी एम्स के लिए सीधी बस सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। घुमारवीं से एम्स के लिए चार तथा बिलासपुर से आठ बार प्रतिदिन बसों का संचालन किया जा रहा है।

उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि नालागढ़ से रामशहर होते हुए तथा बद्दी से बघेरी होते हुए एम्स बिलासपुर के लिए दो नई इलेक्ट्रिक बस सेवाएं शुरू की जाएंगी। इसके अतिरिक्त नाचन विधानसभा क्षेत्र से भी नई बस सेवा शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि आवश्यकता के अनुसार आने वाले समय में अन्य क्षेत्रों को भी इस सुविधा से जोड़ा जाएगा।

उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि मरीजों को उपचार के लिए एम्स बिलासपुर तक समय पर बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाने में यह पहल उपयोगी साबित हो रही है। इससे मरीजों और उनके परिचारकों को बसें बदलने की आवश्यकता नहीं पड़ती और वे निर्धारित समय पर अस्पताल पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में प्रदेश के अन्य क्षेत्रों को भी एम्स बिलासपुर से सीधी बस सेवा के माध्यम से जोड़ा जाएगा।

इन बस सेवाओं का लाभ उठा चुके मरीजों और उनके तीमारदारों का कहना है कि लो-फ्लोरिंग इलेक्ट्रिक बसें मरीजों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए सुविधाजनक हैं। नियमित उपचार, जांच और फॉलोअप के लिए बस से एम्स आने वाले लोगों के समय की बचत हो रही है तथा टैक्सी और निजी वाहनों पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी कम हो रहा है।

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