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हिमाचल समाचार: नेरवा में ₹5 करोड़ की लागत से बनेगा आधुनिक स्कूल भवन, सीएम सुक्खू ने छात्रों से किया सीधा संवाद

"विधायकों को हर 5 साल में देनी पड़ती है परीक्षा" – मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू

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VIDYA SAGAR

शिमला, 27 मई 2026 हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को शिमला जिले के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नेरवा का औचक निरीक्षण किया और वहाँ के विद्यार्थियों के साथ एक आत्मीय व प्रेरणादायक संवाद सत्र में भाग लिया। हाल ही में इस विद्यालय को सीबीएसई (CBSE) पाठ्यक्रम के दायरे में लाया गया है, जिसके बाद से यहाँ छात्रों के दाखिले में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है।

इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री ने नेरवा के लिए ₹5 करोड़ की लागत से एक नए और आधुनिक स्कूल भवन के निर्माण की घोषणा की, जिसका कार्य अगले दो वर्षों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।


मुख्य अंश: संवाद के दौरान छात्रों के दिलचस्प सवाल और सीएम के जवाब

संवाद सत्र के दौरान 10वीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री से राजनीति, व्यक्तिगत जीवन, शिक्षा और स्थानीय समस्याओं को लेकर कई बेबाक सवाल पूछे, जिनका मुख्यमंत्री ने बेहद सहजता से जवाब दिया:-

1. विधायकों की परीक्षा कौन लेता है?

कक्षा 10 के छात्र विहीन चौहान ने जब पूछा कि विधायक बनने के लिए कोई लिखित परीक्षा क्यों नहीं होती, तो मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा:-

“शिक्षकों की तरह हमें परीक्षाओं के लिए कोई तैयार नहीं करता। लेकिन हमारी असली ‘परीक्षा’ हर पांच साल में जनता की अदालत में होती है। जब नागरिक अपने मताधिकार का सही उपयोग करते हैं, तभी सही नेतृत्व देश को मिलता है।”

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इस पर छात्र वैभव ने भी भविष्य में चुनाव लड़ने की अपनी इच्छा जाहिर की।



2. लोग मुख्यमंत्री को ‘योद्धा’ क्यों कहते हैं?

11वीं की छात्रा सारा नेगी के इस सवाल पर सीएम सुक्खू भावुक हुए और अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा, “मैं एक बेहद साधारण परिवार से आता हूँ। जीवन में असफलताएं और चुनौतियाँ हर किसी के सामने आती हैं, लेकिन जो हार मानने के बजाय बार-बार खड़ा होता है और कड़ी मेहनत करता है, वही अंततः सच्चा विजेता बनता है।”



3. ग्रामीण बनाम शहरी शिक्षा का अंतर कैसे मिटेगा?

छात्रा नेहा के सवाल पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गांवों में सीबीएसई स्कूल खोलना इसी दिशा में सरकार का पहला कदम है। ग्रामीण क्षेत्रों में न केवल शैक्षणिक बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत किया जा रहा है, बल्कि योग्य शिक्षकों की नियुक्तियां भी तेजी से की जा रही हैं।



छात्रों के महत्वपूर्ण सुझाव और सरकार का आश्वासन

  • विदेशी भाषाओं की पढ़ाई: छात्रा अदिति सूद ने स्कूलों में विदेशी भाषाएं सिखाने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि सरकार 12वीं के बाद युवाओं को विदेशी भाषाएं सीखने के अवसर देगी ताकि उन्हें विदेशों में रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।

  • ऑन-जॉब ट्रेनिंग: आईटी छात्रा अनुष्का द्वारा व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की तर्ज पर ट्रेनिंग की मांग किए जाने पर सीएम ने इस सुझाव पर सकारात्मक विचार करने का भरोसा दिया।

  • ट्रैफिक जाम से मुक्ति: छात्र वैभव चौहान द्वारा नेरवा कस्बे में ट्रैफिक जाम की समस्या उठाने पर मुख्यमंत्री ने जल्द ही एक बाईपास सड़क निर्माण का आश्वासन दिया।



सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू होने से बदला नेरवा स्कूल का स्वरूप

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने प्रदेश के 150 से अधिक सरकारी स्कूलों में सीबीएसई (CBSE) पाठ्यक्रम की शुरुआत की है, जिसके बेहद सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं।

  • छात्रों की संख्या में भारी उछाल: पिछले वर्ष तक नेरवा स्कूल में 959 विद्यार्थी थे, जो इस नए शैक्षणिक सत्र में 341 की रिकॉर्ड वृद्धि के साथ कुल 1,300 तक पहुंच गए हैं।

  • दो शिफ्टों में चलेगा स्कूल: छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने इस विद्यालय को दो शिफ्टों में संचालित करने की विशेष अनुमति प्रदान की है।

  • स्वच्छता पर जोर: स्कूलों में बेहतर शौचालय और स्वच्छता सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।



छात्रों के साथ किया दोपहर का भोजन: संवाद कार्यक्रम के समापन के बाद, मुख्यमंत्री ने प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए स्कूल के बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर दोपहर का भोजन (मिड-डे मील) भी किया।

इस गरिमामयी अवसर पर कांग्रेस नेता रजनीश किमटा, विनोद जिंटा, एचपीएमसी के उपाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा, शिक्षा सचिव राकेश कंवर सहित स्कूल का स्टाफ और कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


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