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राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने गंगा की सांस्कृतिक व आध्यात्मिक विरासत पर आधारित पुस्तक का किया विमोचन

'भारतीय कला, लोक परंपरा एवं संगीत में गंगा का प्रवाह' पुस्तक पाठकों के बीच; प्रो. विवेकानन्द तिवारी ने किया है लेखन

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VIDYA SAGAR

शिमला, 13 जुलाई 2026

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज शिमला स्थित लोकभवन में एक विशेष गरिमामयी समारोह के दौरान प्रो. विवेकानन्द तिवारी द्वारा लिखित पुस्तक ‘भारतीय कला, लोक परंपरा एवं संगीत में गंगा का प्रवाह’ का विधिवत विमोचन किया। यह पुस्तक भारतीय कला, संगीत और लोक संस्कृति पर जीवनदायिनी नदी गंगा के गहरे ऐतिहासिक व आध्यात्मिक प्रभाव को सहेजने का एक अनूठा प्रयास है।


“गंगा केवल एक नदी नहीं, भारत की प्राचीन सभ्यता का जीवंत प्रतीक है”

विमोचन के अवसर पर उपस्थित प्रबुद्ध जनों को संबोधित करते हुए राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि भारत के लोगों के लिए गंगा केवल पानी का एक स्रोत या नदी मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की प्राचीन सभ्यता, अटूट संस्कृति और समृद्ध आध्यात्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक है।

“समय के साथ भले ही गंगा का मार्ग और स्वरूप बदलता रहा हो, लेकिन वह हमेशा एक मां और जीवनदायिनी के रूप में हमारी सभ्यता का पालन-पोषण करती आई है। गंगा शाश्वतता और पवित्रता की वो अविरल धारा है, जिसने सदियों से हमारी सांस्कृतिक चेतना को सींचा है।” — कविन्द्र गुप्ता, राज्यपाल

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कला, साहित्य और संस्कारों में गंगा का विशेष स्थान

राज्यपाल ने पुस्तक के विभिन्न पहलुओं की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय कला, साहित्य, पौराणिक कथाओं और लोक परंपराओं में गंगा का विशेष और सर्वोच्च स्थान रहा है। उन्होंने कहा:

  • कलाकारों की प्रेरणा: अनेक पीढ़ियों के कवियों, कलाकारों, संगीतकारों और विद्वानों ने गंगा के किनारे बैठकर और उससे प्रेरणा लेकर अपनी कालजयी रचनाओं को समृद्ध किया है।

  • संस्कारों में महत्त्व: आज भी हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों और जीवन के तमाम संस्कारों में गंगाजल को अत्यंत पवित्र और अनिवार्य माना जाता है।

  • दिव्य देवी के रूप में चित्रण: भारतीय कला और मूर्तिकला में गंगा को हमेशा एक दिव्य देवी और रक्षक के रूप में चित्रित किया गया है, जो करुणा, पवित्रता और आध्यात्मिक जागृति की प्रतीक हैं।



लेखक प्रो. विवेकानन्द तिवारी को मिली बधाई

राज्यपाल ने लेखक प्रो. विवेकानन्द तिवारी को इस उत्कृष्ट और ज्ञानवर्धक पुस्तक के प्रकाशन पर हार्दिक बधाई दी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक नई पीढ़ी और आम पाठकों को भारतीय कला, लोक परंपराओं और संगीत पर गंगा के गहरे प्रभाव को बारीकी से समझने में मदद करेगी। साथ ही, यह देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति समाज में सम्मान और जागरूकता की भावना को और अधिक सुदृढ़ करेगी।

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