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ऐतिहासिक समझौता: प्रधानमंत्री की मौजूदगी में जल्द होगा किशाऊ प्रोजेक्ट पर महा-हस्ताक्षर; बिना 1 पैसे के निवेश के हिमाचल कमाएगा ₹600 करोड़ सालाना

मुख्यमंत्री सुक्खू ने की हाई-लेवल बैठक; बोले- "प्रदेश के हितों से कोई समझौता नहीं, भाजपा सरकार के ₹800 करोड़ के वित्तीय बोझ को टाला"

VIDYA SAGAR

शिमला, 14 जुलाई 2026

हिमाचल प्रदेश के विकास और ऊर्जा क्षेत्र के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। बहुप्रतीक्षित 422 मेगावाट (MW) क्षमता की ‘किशाऊ बहुउद्देश्यीय जलविद्युत परियोजना’ के लिए जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में साझेदार राज्यों और भारत सरकार के बीच एक ऐतिहासिक ‘समझौता ज्ञापन’ (MoU) हस्ताक्षरित होने जा रहा है।

इस महा-समझौते को अंतिम रूप देने से पहले, मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज शिमला में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में भारत सरकार द्वारा भेजे गए एमओयू के प्रारूप (Draft MoU) पर गहन मंथन किया गया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।


बिना पूंजी निवेश के ₹600 करोड़ का सालाना राजस्व

बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में हुई वार्ताओं में किशाऊ परियोजना के क्रियान्वयन पर अंतिम सहमति बन गई है। इस संशोधित समझौते की सबसे बड़ी खूबी यह है कि हिमाचल प्रदेश को इस परियोजना में कोई वित्तीय निवेश (Financial Investment) नहीं करना होगा, इसके बावजूद राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 600 करोड़ रुपये का भारी-भरकम राजस्व प्राप्त होगा।

“हमारी सरकार ने हमेशा हिमाचल प्रदेश के हितों को सर्वोपरि रखा है। यह रणनीतिक जीत राज्य के दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित करेगी।” — ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री



पूर्व सरकार के फैसले को पलटा; टाला ₹800 करोड़ का वित्तीय बोझ

मुख्यमंत्री सुक्खू ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले आठ वर्षों से इस परियोजना को लेकर गतिरोध बना हुआ था। पूर्व सरकार ने राज्य की हिस्सेदारी के रूप में लगभग 800 करोड़ रुपये का योगदान देने पर सहमति व्यक्त की थी, जिससे राज्य पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता।

वर्तमान सरकार ने राज्य की माली हालत को देखते हुए इस पुराने प्रारूप को सिरे से खारिज कर दिया। सरकार के कड़े रुख और मजबूत पैरवी के कारण ही आज ऐसी व्यवस्था बनी है जहां बिना एक भी रुपया लगाए हिमाचल को उसके सभी वैध लाभ मिलेंगे।


पानी और बिजली पर हिमाचल का हक सुरक्षित

संशोधित समझौते के तहत यमुना बेसिन में 378 मिलियन घन मीटर जल पर हिमाचल प्रदेश का अधिकार पूरी तरह सुरक्षित कर लिया गया है। नई व्यवस्था में सभी साझेदार राज्यों को बिजली और पानी में उनका वैध हिस्सा मिलेगा, जबकि हिमाचल अपनी आवश्यकता के अनुसार जलाशय से पर्याप्त पानी ले सकेगा।


BBMB से 15 साल पुराने बकाए की वसूली के लिए प्रयास तेज

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) की परियोजनाओं से हिमाचल प्रदेश को मिलने वाले 13,066 मिलियन यूनिट बिजली के लंबित बकाये को हासिल करने के लिए भी प्रयास तेज कर रही है। सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद यह मामला पिछले 15 वर्षों से लटका हुआ है, जिसे अब सरकार तार्किक अंजाम तक पहुंचाएगी।


बैठक में ये दिग्गज रहे मौजूद

इस महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव आर. डी. नजीम, प्रधान सचिव देवेश कुमार और हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) के प्रबंध निदेशक आबिद हुसैन सादिक व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे। वहीं, राज्य के मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत ने देश की राजधानी नई दिल्ली से वर्चुअल माध्यम (Video Conferencing) से इस बैठक में हिस्सा लिया।

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