देवभूमि का वो अनोखा रहस्य: मंडी के ‘बड़ा देव कमरुनाग’, जिनकी झील में समाया है अरबों का खजाना
महाभारत काल से जुड़ा है इतिहास: कौन हैं देव कमरुनाग?

23/05/2026-VIDYA SAGAR
बड़ा देव कमरुनाग महाराज (हिमाचल प्रदेश) -मंडी
मंडी: ‘देवभूमि’ के नाम से विख्यात हिमाचल प्रदेश अपनी प्राचीन संस्कृति, अनूठे रीति-रिवाजों और चमत्कारी देव परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। इन्हीं में से एक सबसे प्रमुख और श्रद्धेय नाम है—बड़ा देव कमरुनाग महाराज। मंडी जनपद के आराध्य देव कमरुनाग जी के प्रति न केवल हिमाचल, बल्कि देशभर के लाखों भक्तों की अटूट आस्था है।
घने देवदार के जंगलों और पहाड़ों के बीच करीब 10,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित देव कमरुनाग का यह पावन धाम अपने भीतर कई ऐसे रहस्य समेटे हुए है, जिसे जानकर विज्ञान भी हैरान रह जाता है।
महाभारत काल से जुड़ा है इतिहास: कौन हैं देव कमरुनाग?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देव कमरुनाग वास्तव में महाभारत काल के महान योद्धा ‘बर्बरीक’ हैं। वे इतने शक्तिशाली थे कि अकेले ही पूरे महाभारत के युद्ध का परिणाम बदल सकते थे। भगवान श्रीकृष्ण ने जब उनसे दान में उनका शीश मांगा, तो बर्बरीक ने सहर्ष अपना शीश काट कर दे दिया।
श्रीकृष्ण ने उनकी इस महानता से प्रसन्न होकर उन्हें कलयुग में ‘कमरुनाग’ के नाम से पूजे जाने का वरदान दिया और उनका शीश इस ऊंचे पहाड़ पर स्थापित कर दिया, जहाँ से वे पूरा युद्ध देख सके।
रहस्यमयी झील: जहाँ भक्त खुद चढ़ाते हैं सोना और चांदी
देव कमरुनाग मंदिर के ठीक साथ में एक प्राचीन और पवित्र झील स्थित है, जिसे ‘कमरुनाग झील’ कहा जाता है। इस झील को लेकर एक अनोखी परंपरा सदियों से चली आ रही है:
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खजाने की झील: यहाँ आने वाले भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर सोने-चांदी के गहने और सिक्के सीधे इस झील में अर्पित कर देते हैं।
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कभी बाहर नहीं निकाला जाता धन: सदियों से इस झील में अरबों रुपये का सोना-चांदी और नकदी अर्पित की जा चुकी है, लेकिन परंपरा के अनुसार इस खजाने को कभी बाहर नहीं निकाला जाता। माना जाता है कि नाग देवता स्वयं इस खजाने की रक्षा करते हैं।
“बड़ा देव कमरुनाग जी के दरबार से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता। वे बारिश के देवता भी माने जाते हैं। जब भी इलाके में सूखा पड़ता है, तो महाराज की पूजा अर्चना के बाद देवकृपा से वर्षा जरूर होती है।”
— मंदिर के स्थानीय पुजारी
जून महीने में सजता है भव्य ‘कमरुनाग मेला’
हर वर्ष जून के महीने में (खासकर 14-15 जून को) यहाँ एक विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसे ‘सैर मेला’ भी कहा जाता है। इस दौरान पूरी मंडी घाटी ‘जय देव कमरुनाग’ के जयकारों से गूंज उठती है। दुर्गम चढ़ाई और कठिन रास्ता होने के बावजूद बाबा के दीदार के लिए हजारों श्रद्धालु पैदल यात्रा करके यहाँ पहुंचते हैं और पवित्र झील की परिक्रमा करते हैं।

भक्तों के लिए संदेश
यदि आप भी मानसिक शांति, प्राकृतिक सुंदरता और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखना चाहते हैं, तो मंडी के बड़ा देव कमरुनाग महाराज के दर्शन अवश्य करें। पहाड़ी वादियों के बीच स्थित यह धाम आपको प्रकृति और ईश्वर के सबसे करीब होने का अहसास कराएगा।
प्रभु कमरुनाग महाराज जी की कृपा आप सभी भक्तों पर सदैव बनी रहे।



