बड़ी खबर: अमेरिकी मार्केट रेगुलेटर (SEC) के साथ गौतम अडानी का बड़ा सेटलमेंट, खत्म होगा घूसखोरी का मामला?
अडानी और अमेरिकी रेगुलेटर के बीच 18 मिलियन डॉलर के जुर्माने पर बनी सहमति; कोर्ट की अंतिम मंजूरी का इंतजार।

15/05/2026-VIDYA SAGAR
नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: भारत के दिग्गज कारोबारी और अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी को अमेरिकी बाजार नियामक सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) से बड़ी राहत मिलती दिख रही है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, अडानी और SEC के बीच एक ‘सेटलमेंट’ समझौता हुआ है, जिसके तहत अडानी ग्रुप अमेरिका को सिविल जुर्माना देने पर सहमत हो गया है।
क्या है पूरा समझौता?
न्यूयॉर्क की एक फेडरल कोर्ट में जमा किए गए दस्तावेजों के अनुसार, गौतम अडानी और सागर अडानी ने $18 मिलियन (लगभग ₹172 करोड़) का सिविल जुर्माना भरने का प्रस्ताव दिया है। इस राशि का विवरण इस प्रकार है:
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गौतम अडानी: $6 मिलियन का व्यक्तिगत जुर्माना।
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सागर अडानी: $12 मिलियन का व्यक्तिगत जुर्माना।
आरोपों को न स्वीकारा, न नकारा
इस सेटलमेंट की सबसे खास बात यह है कि अडानी ने इन आरोपों को न तो स्वीकार किया है और न ही नकारा है। इसे कानूनी भाषा में ‘Consent Decree’ कहा जाता है, जहां पक्षकार केस को लंबा खींचने के बजाय जुर्माना भरकर निपटाना बेहतर समझते हैं। हालांकि, यह समझौता अभी न्यूयॉर्क कोर्ट के जज की अंतिम मंजूरी के अधीन है।
पृष्ठभूमि: आखिर क्या था मामला?
नवंबर 2024 में US SEC ने आरोप लगाया था कि अडानी ग्रुप ने भारत में सौर ऊर्जा (Solar Energy) के प्रोजेक्ट्स हासिल करने के लिए सरकारी अधिकारियों को लगभग $265 मिलियन की रिश्वत देने की योजना बनाई थी। इन आरोपों के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई थी और समूह ने सभी आरोपों को “निराधार” बताया था।
डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (DoJ) भी हटा सकता है आपराधिक मामले
SEC के इस सिविल सेटलमेंट के साथ ही खबरें आ रही हैं कि अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) भी गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे आपराधिक आरोपों को वापस लेने पर विचार कर रहा है। हाल ही में अडानी ने अपनी लीगल टीम में बदलाव करते हुए रॉबर्ट गियुफ्रा जूनियर को शामिल किया है, जो पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भी वकील रह चुके हैं।
बाजार पर असर
इस खबर के आते ही भारतीय शेयर बाजार में अडानी ग्रीन (Adani Green) और अडानी एंटरप्राइजेज के शेयरों में सकारात्मक हलचल देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सेटलमेंट से अडानी ग्रुप पर लगा “अनिश्चितता का बादल” छंट सकता है और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा वापस लौट सकता है।
अहम नोट: यह लेख 15 मई 2026 तक की उपलब्ध जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। अंतिम कानूनी फैसले के लिए कोर्ट के आदेश का इंतजार करना होगा।



