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‘विकसित भारत-2047’ के लिए बौद्ध मूल्य और आधुनिक विज्ञान दोनों जरूरी: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता

बैजनाथ के ताशीजोंग में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन; युवाओं से 'नालंदा परंपरा' के मूल्यों को अपनाने का आह्वान

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VIDYA SAGAR

शिमला/बैजनाथ, 05 जुलाई 2026

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में बढ़ती हिंसा, युद्ध और नैतिक संकटों के बीच हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को बेहद प्रासंगिक बताया है। बैजनाथ के ताशीजोंग में आयोजित एक भव्य राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए राज्यपाल ने कहा कि ‘विकसित भारत-2047’ के सपने को साकार करने के लिए आधुनिक विज्ञान के साथ-साथ हमारी समृद्ध सांस्कृतिक और बौद्ध ज्ञान परंपरा का समन्वय अत्यंत आवश्यक है।

यह राष्ट्रीय संगोष्ठी इंडियन हिमालयन नालंदा बुद्धिस्ट ट्रेडिशन काउंसिल द्वारा खाम्पागर मठ, ताशीजोंग के सहयोग से ‘फ्रॉम नालंदा टू हिमालयास्-दि अन ब्रोकन लिगेसी ऑफ द बुद्धिस्ट नॉलेज ट्रेडिशन’ विषय पर आयोजित की गई थी।


🕊️ वैश्विक संकटों का समाधान: बुद्ध का मध्यम मार्ग

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने धम्मपद के शाश्वत संदेश का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा:-

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“आज पूरा विश्व असहिष्णुता, पर्यावरण संकट और नैतिक गिरावट जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे समय में बुद्ध की करुणा, मध्यम मार्ग और आत्म-ज्ञान की शिक्षाएं ही सही रास्ता दिखा सकती हैं। घृणा को कभी घृणा से नहीं, बल्कि केवल प्रेम और करुणा से ही समाप्त किया जा सकता है।”



🏛️ “हिमालयी मठ हैं नालंदा की जीवंत विरासत के रक्षक”

नालंदा विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि वह केवल एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि विश्व के लिए ज्ञान का प्रकाश-स्तंभ था। समय के साथ भले ही उसका भौतिक स्वरूप नष्ट हो गया, लेकिन भारतीय हिमालय में स्थित मठों और बौद्ध संस्थानों ने हमारी कला, संस्कृति और अमूल्य पांडुलिपियों को सदियों से संभाल कर रखा है।


📚 मठ शिक्षा का आधुनिकीकरण: NIOS की सराहनीय पहल

राज्यपाल ने काउंसिल द्वारा बौद्ध मठों में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) के पाठ्यक्रम को लागू करने की अनूठी पहल की सराहना की।

  • यह कदम पारंपरिक आध्यात्मिक शिक्षा और आधुनिक शिक्षा पद्धति के बीच एक मजबूत सेतु का काम करेगा।

  • इससे युवा भिक्षु और भिक्षुणियां अपनी आध्यात्मिक साधना के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त शैक्षणिक योग्यताएं भी हासिल कर सकेंगे।


👥 युवाओं से आह्वान और गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति

परम पावन दलाई लामा के मार्गदर्शन में चल रहे इस परिषद के प्रयासों की सराहना करते हुए राज्यपाल ने देश के युवाओं से नालंदा परंपरा के मूल आदर्शों—जिज्ञासा, तार्किक चिंतन, अनुशासन और मानव सेवा को अपने जीवन में उतारने की अपील की।

इस ऐतिहासिक संगोष्ठी में कई प्रमुख हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई:

अतिथि/प्रतिनिधि पद/संस्थान
त्सेग्याल चुक्या द्रान्यी धर्म एवं संस्कृति मंत्री, CTA, धर्मशाला
खामत्रुल रिनपोछे आध्यात्मिक प्रमुख, खाम्पागर मठ
किशोरी लाल माननीय विधायक, बैजनाथ
डॉ. राजीव कुमार सिंह निदेशक, NIOS
हेमराज बैरवा उपायुक्त, कांगड़ा
कुलभूषण वर्मा पुलिस अधीक्षक, कांगड़ा

इस संगोष्ठी में उपस्थित सभी विचारकों और धर्मगुरुओं ने आधुनिक समाज की चुनौतियों से निपटने तथा पारंपरिक शिक्षा को वैश्विक पटल पर लाने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की।

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