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देश का नया ‘इन्नोवेशन हब’ बनेगा हिमाचल: तकनीकी संस्थानों के लिए नई राज्य नवाचार नीति को मुख्यमंत्री की मंजूरी

₹2 करोड़ के नवाचार कोष को भी मिली हरी झंडी; युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण स्टार्टअप्स को मिलेगा सीधा बढ़ावा

VIDYA SAGAR

शिमला, 05 जुलाई 2026

हिमाचल प्रदेश को देश के एक प्रमुख नवाचार और स्टार्टअप केंद्र (Innovation Hub) के रूप में स्थापित करने के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार ने तकनीकी शैक्षणिक संस्थानों के लिए ‘राज्य नवाचार नीति’ और इसके सुचारू संचालन के लिए ‘राज्य नवाचार कोष कार्यान्वयन दिशा-निर्देश (2026-2028)’ को औपचारिक मंजूरी दे दी है।

इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और नवोदित उद्यमियों (Startups) के विचारों को व्यावहारिक, तकनीकी और बाजार के अनुकूल समाधानों में बदलना है।



🚀 नीति की मुख्य विशेषताएं और लक्ष्य

यह नीति राज्य के भीतर एक ऐसा इकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) तैयार करेगी, जो नए विचारों को उद्योगों के सहयोग से धरातल पर उतारेगा। इसके तहत निम्नलिखित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:

  • प्रोटोटाइप विकास (Prototype Development): नए विचारों को कामकाजी मॉडल में बदलने के लिए सहायता।

  • स्टार्टअप इनक्यूबेशन और सीड फंडिंग: शुरुआती दौर के व्यवसायों को वित्तीय और ढांचागत मदद।

  • बौद्धिक संपदा (IP) प्रबंधन: पेटेंट और बौद्धिक संपदा के पंजीकरण को आसान बनाना।

  • उद्योगों के साथ सहयोग: पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ परिणामों पर आधारित काम।


💰 ₹2 करोड़ का ‘राज्य नवाचार कोष’

नीति को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारने के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2026-2028 की अवधि के लिए 2 करोड़ रुपये के शुरुआती प्रावधान के साथ ‘राज्य नवाचार कोष’ का गठन किया है। इस कोष का उपयोग इन प्रमुख गतिविधियों के लिए किया जाएगा:

  • नवाचारों को आकार देने के लिए माइक्रो ग्रांट और सीड फंडिंग

  • इनक्यूबेशन केंद्रों को मजबूत करने के लिए वित्तीय सहायता।

  • राज्य स्तर पर नवाचार प्रतियोगिताएं और बूट कैंप का आयोजन।

  • शिक्षकों व विद्यार्थियों के लिए विशेष तकनीकी और व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम।

  • कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और निजी उद्योगों के साथ सह-वित्तपोषण।


👥 समावेशी विकास: महिलाओं और ग्रामीण युवाओं पर विशेष ध्यान

इस नीति की सबसे बड़ी खूबी इसका समावेशी होना है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि तकनीकी शिक्षा और स्टार्टअप के क्षेत्र में महिलाओं, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) तथा ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे, ताकि समाज के हर वर्ग को आगे बढ़ने का समान अवसर मिले।

💡 बौद्धिक संपदा (IP) पर बड़ा फैसला

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा, “इस कार्यक्रम के तहत विकसित होने वाले नवाचारों (Innovations) का असली मालिकाना हक केवल नवाचारकर्ताओं (Innovators) के पास ही रहेगा। शैक्षणिक संस्थानों को केवल शैक्षणिक उपयोग के लिए नॉन-एक्सक्लूसिव अधिकार दिए जाएंगे, जिससे युवाओं के अधिकारों की रक्षा होगी।”


📊 क्रियान्वयन और दो साल बाद समीक्षा

नीति के सुचारू संचालन के लिए तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के निदेशक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

  • संस्थागत स्तर पर: क्लस्टर इनोवेशन समितियां काम करेंगी।

  • राज्य स्तर पर: राज्य नवाचार सलाहकार समूह परियोजनाओं के चयन और फंड के सही उपयोग की निगरानी करेगा।

2 साल बाद व्यापक मूल्यांकन: सरकार इस नीति के लागू होने के दो वर्ष बाद इसकी व्यापक समीक्षा करेगी। इस समीक्षा के दौरान यह देखा जाएगा कि नीति के माध्यम से कितने प्रोटोटाइप तैयार हुए, कितने स्टार्टअप्स स्थापित हुए, कितने पेटेंट पंजीकृत हुए और राज्य में कुल कितना निवेश और रोजगार सृजित हुआ।

यह पहल निश्चित रूप से हिमाचल प्रदेश के आर्थिक विकास को गति देने और राज्य के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।

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