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मनोरंजन का नया वैश्विक दौर: ओटीटी की चुनौतियाँ और भारतीय सांस्कृतिक विमर्श

शिमला स्थित भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय का विशेष व्याख्यान आयोजित

VIDYA SAGAR


शिमला | 13 मई, 2026

ऐतिहासिक राष्ट्रपति निवास स्थित भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (IIAS) में आज ‘वैश्विक संदर्भों में मनोरंजन का बढ़ता दायरा- चुनौतियाँ और संभावनाएं’ विषय पर एक बौद्धिक विमर्श का आयोजन किया गया। इस विशेष व्याख्यान के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक अनंत विजय रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक प्रोफेसर हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने की।


ओटीटी: मनोरंजन की नई वैश्विक व्यवस्था

अपने संबोधन में अनंत विजय ने बताया कि किस तरह ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स ने मनोरंजन की पारंपरिक सीमाओं को ध्वस्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रांति के इस दौर में यह माध्यम विश्व के सबसे तेजी से बढ़ते उद्योगों में शुमार हो चुका है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि मनोरंजन अब केवल सिनेमाघरों या टीवी तक सीमित नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की हथेली (स्मार्टफोन) तक पहुंच चुका है।



नैरेटिव निर्माण और सामाजिक प्रभाव

व्याख्यान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ओटीटी सामग्री में परोसी जा रही हिंसा, नग्नता और वैचारिक आख्यानों (Narratives) पर केंद्रित रहा। अनंत विजय ने कहा:

“आज वेब सीरीज के माध्यम से सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक विमर्शों को एक नए सांचे में ढाला जा रहा है। यह महज मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज के सांस्कृतिक दृष्टिकोण को बदलने का एक सचेत प्रयास है।”


उन्होंने लोकप्रिय वेब सीरीज के उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे मनोरंजन उद्योग अब एक विशेष प्रकार के ‘नैरेटिव’ निर्माण की प्रक्रिया में संलग्न है, जिसका सीधा प्रभाव युवा पीढ़ी की सोच पर पड़ रहा है।


सांस्कृतिक जड़ें और स्थानीयता का महत्व

कोविड-19 काल का जिक्र करते हुए वक्ता ने रेखांकित किया कि दर्शक अब अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं। भारतीय जीवनबोध और स्थानीय संवेदनाओं पर आधारित कहानियों को वैश्विक स्तर पर सराहा जा रहा है। उन्होंने भारतीय भाषाओं के विस्तार पर खुशी जताते हुए कहा कि ओटीटी की वजह से आज भारतीय फिल्में दुनिया के कोने-कोने में देखी जा रही हैं, जिससे हमारी सांस्कृतिक पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई है।


एआई और सेंसरशिप पर गंभीर चर्चा

व्याख्यान के उपरांत एक जीवंत प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें अध्येताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल सेंसरशिप जैसे ज्वलंत विषयों पर प्रश्न पूछे। इन सवालों का जवाब देते हुए अनंत विजय ने कहा कि तकनीक के इस दौर में ‘मीडिया साक्षरता’ और ‘आलोचनात्मक दृष्टि’ का होना अनिवार्य है। उन्होंने रचनात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।


एक बहुआयामी व्यक्तित्व का संबोधन

वर्तमान में दैनिक जागरण में संपादक (फीचर) के रूप में कार्यरत अनंत विजय साहित्य, सिनेमा और संस्कृति के गहरे पारखी माने जाते हैं। उनके इस व्याख्यान को उपस्थित प्रतिभागियों ने ‘विचारोत्तेजक’ और ‘समसामयिक’ करार दिया।


संस्थान के आधिकारिक फेसबुक पेज पर प्रसारित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ऑनलाइन दर्शक भी जुड़े, जो डिजिटल मीडिया के बदलते स्वरूप पर हो रहे इस गंभीर विमर्श के साक्षी बने।


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