मिशन-32: हिमाचल में हरित क्रांति की तैयारी, इस मानसून रोपे जाएंगे 50 लाख पौधे
राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के तहत 4 हजार हेक्टेयर भूमि होगी हरी-भरी; पहली बार चिनार के पौधों पर विशेष जोर

04/07/2026-VIDYA SAGAR
शिमला।
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हिमाचल प्रदेश को पर्यावरण के क्षेत्र में और अधिक समृद्ध बनाने के लिए वन विभाग ने इस मानसून सीजन के लिए एक महा-अभियान की रूपरेखा तैयार की है। राज्य के हरित आवरण (Green Cover) को बढ़ाने के संकल्प के साथ इस बार रिकॉर्ड 7 से 8 हजार हेक्टेयर भूमि पर करीब 50 लाख पौधे रोपने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
इस विशाल अभियान को सफल बनाने के लिए वन बल प्रमुख (HoFF) डॉ. संजय सूद ने प्रदेश के सभी वन मंडलाधिकारियों (DFOs) को कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
राजीव गांधी वन संवर्धन योजना का मुख्य योगदान
इस वर्ष के पौधरोपण अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कुल लक्ष्य में से लगभग 4 हजार हेक्टेयर भूमि पर अकेले राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के तहत पौधारोपण किया जाएगा। विभाग ने राज्य के विभिन्न जिलों की भौगोलिक परिस्थितियों और जलवायु के अनुकूल पौधों का चयन किया है। इस बार देवदार और अन्य पारंपरिक पेड़ों के साथ-साथ पहली बार चिनार के पौधे रोपे जाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
क्या है ‘मिशन-32’ का संकल्प?
हिमाचल प्रदेश सरकार और वन विभाग ने वर्ष 2030 तक राज्य के हरित आवरण को बढ़ाकर 32 प्रतिशत करने का संकल्प लिया है, जिसे ‘मिशन-32’ का नाम दिया गया है। आगामी वन महोत्सव के दौरान प्रदेश के सभी जिलों में इस टारगेट को हासिल करने के लिए माइक्रो-प्लानिंग के तहत काम शुरू कर दिया गया है।
वन बल प्रमुख की अपील:
“मिशन-32 के लक्ष्य को पूरा करने में ‘जाइका वानिकी परियोजना’ बेहतरीन कार्य कर रही है। मैं प्रदेश की जनता से आह्वान करता हूँ कि वे इस महा-अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लें। केवल पौधा लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि उनके संरक्षण में भी अपना बहुमूल्य योगदान दें।”
— डॉ. संजय सूद, वन बल प्रमुख (हिमाचल प्रदेश)
महत्वपूर्ण उपलब्धियां और आगामी योजनाएं
1. विश्व पर्यावरण दिवस से हुआ था आगाज
इस बड़े अभियान की नींव मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने गत 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शिमला में खुद चिनार का पौधा लगाकर रखी थी। इसके बाद, 25 जून को भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (IIAS) शिमला में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह सिंधवालिया ने भी इस अभियान को आगे बढ़ाया।
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2. जाइका (JICA) परियोजना की बड़ी भूमिका
राज्य में हरित क्रांति लाने के लिए जाइका वानिकी परियोजना एक मजबूत स्तंभ साबित हुई है:
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2018 से 2025 तक: जाइका ने राज्य के 22 वन मंडलों में 8,343 हेक्टेयर भूमि पर सफलतापूर्वक विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे हैं।
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मुख्यमंत्री वन विस्तार योजना: इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत जाइका ने पिछले वर्ष भी 124 हेक्टेयर भूमि को हरा-भरा करने में सफलता पाई थी।
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अधिकारियों को सख्त निर्देश
डॉ. संजय सूद ने सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं जैसे—राजीव गांधी वन संवर्धन योजना, मुख्यमंत्री वन विस्तार योजना, और राजीव गांधी ग्रीन एडॉप्शन योजना को धरातल पर पूरी पारदर्शिता और मजबूती के साथ लागू करने के निर्देश दिए हैं ताकि पौधों की उत्तरजीविता (Survival Rate) को सुनिश्चित किया जा सके।



