लेटस्ट न्यूजहिमाचल न्यूज

मिसाल

जब खाकी के भीतर जागी इंसानियत, नंगे पैर दौड़ने आए युवक के लिए SP बने 'मसीहा'

23/04/2026-VIDYA SAGAR

महंगे जूतों की भीड़ में टूटी चप्पल पहनकर पहुंचा था अभ्यर्थी; एसपी की दरियादिली ने जीता सबका दिल

बिलासपुर/हिमाचल प्रदेश:

कहते हैं कि वर्दी के पीछे एक सख्त इंसान होता है, लेकिन कभी-कभी उसी वर्दी के भीतर छिपा एक संवेदनशील इंसान ऐसी मिसाल पेश करता है जिसे दुनिया सलाम करती है। ऐसा ही कुछ देखने को मिला पुलिस भर्ती के दौरान, जहाँ एक अभ्यर्थी की मजबूरी और एक पुलिस अधिकारी की दरियादिली ने सबका गला भर दिया।

टूटी चप्पल और गरीबी का हौसला

पुलिस भर्ती की 5 किलोमीटर की शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) चल रही थी। मैदान में मौजूद लगभग सभी अभ्यर्थियों के पैरों में नामी ब्रांडों के महंगे स्पोर्ट्स जूते थे। लेकिन इसी भीड़ में एक युवक ऐसा भी था, जिसके पैरों में केवल साधारण चप्पलें थीं। गरीबी इतनी कि दौड़ने के लिए जूते तक नसीब नहीं थे, पर सीने में पुलिस भर्ती होकर परिवार का सहारा बनने का जुनून था।

जब SP साहब की पड़ी नजर

मैदान में मुस्तैद पुलिस अधीक्षक (SP) की नजर जब उस युवक पर पड़ी, तो उन्होंने उसे पास बुलाया। SP साहब: “बेटा, तुम 5 किलोमीटर की दौड़ लगाने आए हो, लेकिन पैरों में जूते नहीं हैं? कंकड़-पत्थर चुभेंगे, दौड़ोगे कैसे?” युवक (भावुक होकर): “साहब, जूते खरीदने के पैसे नहीं हैं, इसलिए इसी में अभ्यास किया और इसी में दौड़ने आ गया।”

युवक की यह बात सुनकर वहां मौजूद SP साहब और अन्य पुलिस स्टाफ की आंखें नम हो गईं। नौकरी की तड़प और आर्थिक तंगी का ऐसा मेल देखकर अधिकारी भावुक हो उठे।

तुरंत मंगवाए जूते, फिर शुरू हुई दौड़

SP साहब ने बिना देर किए तुरंत अपने स्टाफ को भेजकर उस युवक के लिए बढ़िया क्वालिटी के दौड़ने वाले जूते मंगवाए। उन्होंने खुद सुनिश्चित किया कि युवक को दौड़ने में कोई तकलीफ न हो। उन्होंने युवक की पीठ थपथपाते हुए उसे अच्छे से दौड़ने और सफल होने का आशीर्वाद दिया।

सोशल मीडिया पर हो रही सराहना

इस घटना की वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। लोग कह रहे हैं कि ऐसे अधिकारी ही समाज में पुलिस की छवि को ‘मित्र पुलिस’ के रूप में स्थापित करते हैं। उस छात्र के लिए यह सिर्फ जूते नहीं थे, बल्कि उसकी उम्मीदों को मिली एक नई उड़ान थी।


सोशल मीडिया कैप्शन (For Engagement):

“गरीबी पैरों में चप्पल दे सकती है, पर हौसलों को नहीं बांध सकती। सलाम है ऐसे जांबाज अधिकारी को जिन्होंने एक गरीब छात्र के सपनों को टूटने नहीं दिया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button