राजा विजेंद्र सिंह का निधन: हिमाचल ने खोया एक समर्पित और जनप्रिय नेता, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने जताया गहरा शोक
नालागढ़ के पूर्व विधायक और पूर्व स्वास्थ्य राज्य मंत्री राजा विजेंद्र सिंह के निधन पर राजनीतिक जगत में शोक की लहर, विकास कार्यों और सादगी के लिए हमेशा किए जाएंगे याद

VIDYA SAGAR
शिमला | 01 जुलाई, 2026
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हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ, नालागढ़ के पूर्व विधायक और पूर्व स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री राजा विजेंद्र सिंह का निधन हो गया है। उनके निधन पर प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने गहरा दुख प्रकट करते हुए शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।
एक अनुभवी और जनप्रिय नेतृत्व का अंत
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने राजा विजेंद्र सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे एक सम्मानित, अनुभवी और बेहद जनप्रिय नेता थे। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक सफर के दौरान हिमाचल प्रदेश के विकास, विशेषकर स्वास्थ्य क्षेत्र की मजबूती में ऐतिहासिक योगदान दिया। पूर्व मुख्यमंत्री राम लाल ठाकुर के कार्यकाल के दौरान स्वास्थ्य राज्य मंत्री के रूप में उन्होंने राज्य के दूरदराज क्षेत्रों तक चिकित्सा सेवाओं के विस्तार के लिए सराहनीय कार्य किए थे।
नालागढ़ और हिमाचल की प्रगति में अमूल्य योगदान
राजा विजेंद्र सिंह का हिमाचल की राजनीति में एक लंबा और शानदार इतिहास रहा है। वे कुल पांच बार हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए:
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वर्ष 1977
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वर्ष 1982
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वर्ष 1985
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वर्ष 1990
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वर्ष 1993
अपने इस दीर्घकालिक राजनैतिक जीवन में उन्होंने हमेशा नालागढ़ क्षेत्र की जनता के कल्याण और अधिकारों के लिए संघर्ष किया। क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को सुधारने और आम जनमानस की समस्याओं को दूर करने के लिए वे निरंतर सक्रिय रहे।
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“राजा विजेंद्र सिंह अपनी सादगी, समर्पण और जनसेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के लिए सदैव याद किए जाएंगे। राज्य की प्रगति और जनकल्याण के लिए उनके अमूल्य योगदान को हमेशा स्मरण किया जाएगा।” — रोहित ठाकुर, शिक्षा मंत्री (हिमाचल प्रदेश)
शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदनाएं
शिक्षा मंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के सदस्यों के प्रति अपनी गहरी सहानुभूति प्रकट करते हुए कहा कि इस अपूरणीय क्षति को सहन करने के लिए ईश्वर परिवार को शक्ति और संबल प्रदान करे। राजा विजेंद्र सिंह के जाने से हिमाचल प्रदेश की राजनीति में जो शून्य पैदा हुआ है, उसे कभी भरा नहीं जा सकेगा।



