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संघर्ष को सलाम: बचपन में छूटा माता-पिता का साया, दादाजी ने गन्ने का ठेला लगाकर पोती को बनाया 12वीं का टॉपर

गरीबी को मात देकर बेटी ने 12वीं बोर्ड में हासिल किए 500 में से 494 अंक; दादाजी के पसीने की हर बूंद को किया सफल, अब उच्च शिक्षा के लिए मदद की दरकार।

28/05/2026-VIDYA SAGAR

शिमला / बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश): प्रतिभा किसी परिचय या धन-दौलत की मोहताज नहीं होती, इसे एक बार फिर सच कर दिखाया है हिमाचल की एक होनहार बेटी ने। बचपन में ही सिर से माता-पिता का साया उठ जाने के बाद, जिस बेटी का भविष्य अंधकार में डूबा नजर आ रहा था, आज उसने अपनी कड़ी मेहनत से सफलता का एक नया इतिहास रच दिया है। 12वीं बोर्ड की परीक्षाओं में इस बेटी ने 500 में से 494 अंक हासिल कर पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है।


गन्ने के रस का ठेला और दादाजी का अटूट हौसला

इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे जितनी कहानी बेटी की मेहनत की है, उतनी ही कहानी उसके बुजुर्ग दादाजी के खून-पसीने के संघर्ष की भी है। माता-पिता के गुजर जाने के बाद दादाजी ने अपनी पोती को कभी बेसहारा महसूस नहीं होने दिया।

बढ़ती उम्र और आर्थिक तंगहाली के बावजूद, दादाजी ने दिन-रात मेहनत की और गन्ने के रस का ठेला लगाकर घर का खर्च चलाया और पोती की पढ़ाई का खर्च उठाया। कड़कड़ाती धूप और हाड़ कंपाने वाली ठंड में भी दादाजी का चक्का सिर्फ इसलिए घूमता रहा ताकि उनकी पोती की पढ़ाई का पहिया न थमे।


दादाजी के पसीने की हर बूंद को किया सफल

पोती ने भी दादाजी के इस निस्वार्थ त्याग और मेहनत का मोल समझा। उसने विपरीत परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बीच दिन-रात एक कर दिया। जब रिजल्ट आया, तो दादाजी की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। 12वीं की परीक्षा में 500 में से 494 अंक लाकर बेटी ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो गरीबी कभी आड़े नहीं आ सकती।


“यह अंक सिर्फ मेरी मेहनत के नहीं हैं, बल्कि यह मेरे दादाजी के उस पसीने की हर एक बूंद की कीमत है जो उन्होंने मेरे लिए बहाया है। मैं पढ़-लिखकर उनका नाम और रोशन करना चाहती हूँ।” > — भावुक होकर बोलीं टॉपर बेटी


बड़ी कामयाबी, लेकिन समाज की बेरुखी से छिटका दर्द

इतनी बड़ी और प्रेरणादायक सफलता के बाद जहां इस बेटी के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा होना चाहिए था, वहीं जमीनी हकीकत थोड़ी मायूस करने वाली है। परिवार के बेहद गरीब होने के कारण अभी तक किसी बड़े प्रशासनिक अधिकारी या सामाजिक संगठन ने इस होनहार बेटी की सुध नहीं ली है और न ही आगे की पढ़ाई के लिए कोई बड़ी सराहना या मदद सामने आई है।

सोशल मीडिया पर अब इस परिवार के संघर्ष की तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं, और लोग सरकार व समाज के सक्षम लोगों से अपील कर रहे हैं कि इस होनहार और मेधावी बेटी को उच्च शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप या वित्तीय सहायता तुरंत प्रदान की जाए, ताकि इसका भविष्य और निखर सके।


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