हिमाचल प्रदेश में ‘हाई वैल्यू नट मिशन’ का शंखनाद; बागवानों के लिए खुलेंगे समृद्धि के नए द्वार
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की बड़ी पहल: वर्ष 2026 से 2031 तक 1000 हेक्टेयर क्षेत्र में वैज्ञानिक तकनीकों से बदलेगी बागवानी की सूरत, जनजातीय क्षेत्रों में चिलगोजा संरक्षण को विशेष प्राथमिकता।

VIDYA SAGAR
शिमला, 12 जुलाई 2026
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हिमाचल प्रदेश के बागवानी क्षेत्र को वैश्विक पटल पर चमकाने और किसानों व बागवानों की आय में ऐतिहासिक वृद्धि करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना का खाका तैयार किया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार वर्ष 2026 से 2031 तक ‘हाई वैल्यू नट मिशन’ (High-Value Nut Mission) की शुरुआत करने जा रही है। इस मिशन के तहत राज्य में अखरोट, बादाम, खुमानी और चिलगोजा जैसी उच्च मूल्य वाली समशीतोष्ण (टेम्परेट) नट फसलों की खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जाएगा।
पारंपरिक चुनौतियों का वैज्ञानिक समाधान
वर्तमान में प्रदेश का बागवानी क्षेत्र पुराने हो चुके बगीचों, कम उत्पादकता, आधुनिक कोल्ड स्टोरेज व पैकेजिंग जैसी बुनियादी ढांचों की कमी और मूल्य संवर्धन (Value Addition) के सीमित अवसरों से जूझ रहा है। ‘हाई वैल्यू नट मिशन’ इन सभी चुनौतियों का एक ठोस और वैज्ञानिक समाधान पेश करेगा। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक बाग प्रबंधन, आधुनिक अवसंरचना और बेहतर बाजार पहुंच सुनिश्चित करके बागवानी के सतत विकास के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है।
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1,000 हेक्टेयर में कायाकल्प और हाई-डेंसिटी प्लांटेशन
इस पांच वर्षीय मिशन के तहत राज्य के लगभग 1,000 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया जाएगा, जिसे दो प्रमुख भागों में विभाजित किया गया है:
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900 हेक्टेयर में पुराने बागों का उद्धार: वैज्ञानिक तरीकों जैसे कैनोपी प्रबंधन, टॉप-वर्किंग, पुराने व अनुपयोगी पेड़ों को हटाने, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार और उन्नत जल प्रबंधन तकनीकों से कम उत्पादन देने वाले बागों को नया जीवन दिया जाएगा।
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100 हेक्टेयर में मॉडल उच्च घनत्व (High-Density) बाग: इस क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली पौध सामग्री, सूक्ष्म सिंचाई (Micro-Irrigation) और जलवायु-अनुकूल खेती (Climate-Resilient Farming) की आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा।
हाई-टेक नर्सरियां और उत्कृष्टता केंद्र (Centers of Excellence)
बागवानों को प्रमाणित और रोगमुक्त पौध सामग्री आसानी से उपलब्ध कराने के लिए राज्य के प्रमुख नट उत्पादक क्षेत्रों में चार हाई-टेक नर्सरियां और दो उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे। ये संस्थान न केवल शोध और प्रशिक्षण के केंद्र होंगे, बल्कि बागवानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से रूबरू कराने के लिए विस्तार सेवाओं का भी संचालन करेंगे।
10 आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयाँ और मजबूत बाजार व्यवस्था
किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने और कटाई के बाद होने वाले नुकसान (Post-Harvest Losses) को कम करने के लिए मिशन के तहत 10 आधुनिक संग्रह, ग्रेडिंग, छंटाई, पैकेजिंग और प्रसंस्करण (Processing) इकाइयाँ स्थापित की जाएंगी। इसके साथ ही:
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किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को बढ़ावा दिया जाएगा।
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सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के जरिए निजी निवेश को आकर्षित किया जाएगा।
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कृषि अवसंरचना निधि (AIF) जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों के लिए बैंकों से वित्तीय मदद पाना बेहद आसान बनाया जाएगा।
जनजातीय क्षेत्रों के लिए वरदान: चिलगोजा का संरक्षण
चिलगोजा के पारिस्थितिक (Ecological) और आर्थिक महत्व को देखते हुए, मिशन के तहत जनजातीय क्षेत्रों में इसके संरक्षण और पुनर्जीवन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। प्राकृतिक पुनर्जनन को बढ़ावा देने, समुदाय आधारित वन प्रबंधन और चिलगोजा बीजों के अंकुरण के लिए विशेष प्रसार सुविधाएं स्थापित की जाएंगी। इससे जैव विविधता के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों, विशेषकर महिलाओं के लिए स्थायी आजीविका के अवसर पैदा होंगे।
“बागवानी में विकास और आधुनिकीकरण के नए युग की शुरुआत” — मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इस मिशन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “हिमाचल प्रदेश में समशीतोष्ण नट फसलों की खेती की अपार संभावनाएं हैं। यह मिशन आधुनिक तकनीक और बेहतर आधारभूत संरचना के माध्यम से हमारे किसानों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।”
उन्होंने आगे कहा कि इस पहल से न केवल उत्पादकता और मुनाफे में भारी वृद्धि होगी, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती मिलेगी। सरकार बागवानी को एक सुदृढ़, तकनीक-आधारित और बाजारोन्मुखी क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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निष्कर्ष:
‘हाई वैल्यू नट मिशन’ के माध्यम से बागों के कायाकल्प, ब्रांडिंग और निर्यात संवर्धन (Export Promotion) पर दिया जा रहा विशेष ध्यान हिमाचल की आर्थिकी को बदलने वाला साबित होगा। महिलाओं, जनजातीय समुदायों और छोटे किसानों को लक्षित सहायता प्रदान करके, यह मिशन प्रदेश के हजारों बागवान परिवारों के जीवन में समृद्धि का एक नया सवेरा लेकर आने के लिए तैयार है।



