सुधीर शर्मा अपनी बोल-वाणी सुधारें, हिमाचली संस्कृति के अनुरूप करें भाषा का प्रयोग: राजेश धर्माणी
तकनीकी शिक्षा मंत्री ने विधायक सुधीर शर्मा की अमर्यादित टिप्पणी पर किया तीखा पलटवार; कहा— "सुर्खियों में रहने के लिए कर रहे राजनीतिक कुंठा का प्रदर्शन"

VIDYA SAGAR
समाचार विस्तार
शिमला, 8 अगस्त 2026 :
हिमाचल प्रदेश के तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने भारतीय जनता पार्टी के विधायक सुधीर शर्मा द्वारा मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के खिलाफ दिए गए कथित अमर्यादित बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है। शिमला से जारी एक प्रेस वक्तव्य में धर्माणी ने सुधीर शर्मा को अपनी बोल-वाणी सुधारने और देवभूमि हिमाचल की उच्च संस्कृति, सभ्यता एवं सामाजिक मर्यादाओं के अनुरूप सार्वजनिक जीवन में भाषा का प्रयोग करने की सख्त सलाह दी है।
राजेश धर्माणी ने कहा कि मुख्यमंत्री के विरुद्ध इस्तेमाल की गई असभ्य शब्दावली बेहद निंदनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल की राजनीतिक संस्कृति में वैचारिक मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत मर्यादा और परस्पर सम्मान बनाए रखने की समृद्ध परंपरा रही है, और इस प्रकार की अमर्यादित भाषा को राज्य का समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा।
‘सस्ते प्रचार और राजनीतिक कद बढ़ाने का प्रयास’
सुधीर शर्मा पर हमला बोलते हुए तकनीकी शिक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि वे ऐसी बयानबाज़ी के ज़रिए केवल मीडिया की सुर्खियों में बने रहने और अपना राजनीतिक वजूद बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
“सुधीर शर्मा जिस राजनीतिक दल (भाजपा) में वर्तमान में शामिल हुए हैं, वहाँ ऐसी असभ्य भाषा बोलने वालों को प्रोत्साहन देने की परंपरा रही है। शायद इसी कारण वे अपनी पार्टी के भीतर अपना कद बढ़ाने के लिए ऐसी बयानबाज़ी कर रहे हैं।”
— राजेश धर्माणी (तकनीकी शिक्षा मंत्री, हिमाचल प्रदेश)
धर्माणी ने आगे कहा कि भाजपा के भीतर विभिन्न गुटों में चल रही खींचतान के बीच सुधीर शर्मा को इस तरह की शब्दावली से कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिलने वाला। हिमाचल की जनमानस सब समझती है और सही समय आने पर इसका करारा जवाब देगी।
‘आम जनता से मुख्यमंत्री का जुड़ाव सादगी का प्रतीक’
सुधीर शर्मा की टिप्पणी पर जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि वे अपनी राजनीतिक कुंठा के कारण मुख्यमंत्री के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर राजनीति के शीर्ष तक पहुंचे हैं और वे आम जनमानस के दर्द व समस्याओं को भली-भांति समझते हैं।
मुख्यमंत्री की सादगी का बचाव करते हुए धर्माणी ने कहा:
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जन-सहानुभूति: मुख्यमंत्री का आम लोगों के बीच जाना और उनसे सहजता से मिलना हिमाचली संस्कृति के अपनापन को दर्शाता है।
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सादगी पर तंज गलत: यदि मुख्यमंत्री किसी सामान्य व्यक्ति के पास जाकर अपने बाल कटवाते हैं, तो इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
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संवेदनशीलता का प्रमाण: आम नागरिक से सहजता से जुड़ना किसी नेता की कमजोरी नहीं, बल्कि जनता के प्रति उसके समर्पण का प्रमाण है।
भाषा की शालीनता बनाए रखने की अपील
तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक विचारों का भिन्न होना स्वाभाविक है, लेकिन भाषण और बयानबाज़ी में व्यक्तिगत मर्यादा और शालीनता बनाए रखना हर जनप्रतिनिधि का नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने सुधीर शर्मा से आग्रह किया कि वे अपनी भाषा में संयम बरतें और हिमाचल की सभ्य व संस्कारित राजनीतिक परंपराओं का सम्मान करें।



