हिमाचल सरकार का मछुआरों को बड़ा तोहफा: नावों पर 70% और गियर पर 90% सब्सिडी, आर्थिकी को मिलेगा बल
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का ऐलान— 'ब्लू इकोनॉमी' को बढ़ावा देकर ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ेगी सरकार

VIDYA SAGAR
समाचार विस्तार
शिमला, 8 अगस्त2026 :
हिमाचल प्रदेश की सुखविन्द्र सिंह सुक्खू सरकार ने राज्य के मछुआरा समुदाय की आजीविका को बेहतर बनाने और मत्स्य पालन अवसंरचना को आधुनिक रूप देने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत की है। सरकार द्वारा अब मछुआरों को नई नावें खरीदने पर 70 प्रतिशत और मछली पकड़ने के उपकरणों (कास्ट नेट एवं गिल नेट) पर 90 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी प्रदान की जा रही है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य में मत्स्य पालन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। सरकार हिमाचल में ‘ब्लू इकोनॉमी’ (Blue Economy) को बढ़ावा देकर ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका और रोजगार के स्थायी अवसर पैदा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
1. फिशिंग बोट सब्सिडी योजना (70% अनुदान)
राज्य के प्रमुख जलाशयों में मछली पकड़ने वाली नौकाओं के बेड़े को आधुनिक और सुरक्षित बनाने के लिए यह योजना शुरू की गई है।
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लागत व सब्सिडी: ₹50,000 की कुल लागत वाली नाव पर 70% राशि (₹35,000) राज्य सरकार देगी, जबकि लाभार्थी को केवल 30% (₹15,000) देना होगा।
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प्रमुख क्षेत्र: गोबिंद सागर, पोंग डैम, चमेरा, रणजीत सागर और कोल डैम।
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पात्रता की शर्तें:
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आवेदक किसी पंजीकृत प्राथमिक मत्स्य सहकारी समिति का सक्रिय सदस्य हो।
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वित्तीय वर्ष के दौरान कम से कम 50 दिन मछली पकड़ने का काम किया हो।
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2. सब्सिडाइज्ड फिशिंग गियर योजना (90% अनुदान)
मछली पकड़ने के उपकरणों को किफायती बनाने के लिए सरकार ने नेट (जाल) पर 90% की छूट देने का फैसला किया है। इसके तहत direct benefit transfer (DBT) के ज़रिए सीधी वित्तीय सहायता दी जाएगी।
| उपकरण का प्रकार | लाभार्थी वर्ग | कुल लागत | सरकार की सब्सिडी (90%) | मछुआरे का अंश (10%) |
| कास्ट नेट (Cast Net) | नदी क्षेत्र (4,000 सक्रिय मछुआरे) | ₹3,000 | ₹2,700 | ₹300 |
| गिल नेट (Gill Net) | जलाशय क्षेत्र (3,000 सक्रिय मछुआरे) | ₹5,000 | ₹4,500 | ₹500 |
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पात्रता मानदंड: लाभार्थी के पास मत्स्य विभाग द्वारा जारी कम से कम 3 वर्षों का वैध लाइसेंस होना अनिवार्य है।
ग्रामीण अर्थशास्त्र को मिलेगी मजबूती
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि इस कल्याणकारी पहल से न केवल मछुआरों की सुरक्षा, कार्यकुशलता और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, बल्कि राज्य में मछली उत्पादन और मूल्य संवर्धन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जाएगी।



