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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अब सोमवार और शुक्रवार को केवल ‘वर्चुअल’ सुनवाई, ईंधन बचाने के लिए जज करेंगे ‘कारपूल’

ईंधन संकट और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में न्यायपालिका का बड़ा कदम; रजिस्ट्री स्टाफ को भी मिला 'वर्क फ्रॉम होम' का विकल्प

VIDYA SAGAR

नई दिल्ली | 16 मई, 2026

मुख्य समाचार: देश की शीर्ष अदालत ने वैश्विक ईंधन संकट और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी मिसाल पेश की है। सुप्रीम कोर्ट (SC) ने आधिकारिक सर्कुलर जारी कर घोषणा की है कि अब हर सोमवार और शुक्रवार (जिन्हें ‘मिसलेनियस डे’ कहा जाता है) को अदालत में कोई भी फिजिकल सुनवाई नहीं होगी। इन दोनों दिनों में सभी मामलों की सुनवाई केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Online Hearing) के माध्यम से की जाएगी।


प्रधानमंत्री की अपील और ईंधन की बचत

यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘पश्चिम एशिया संकट’ (West Asia Crisis) के बीच नागरिकों से ईंधन बचाने की अपील के बाद लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के सचिव जनरल द्वारा जारी आदेश के अनुसार:

  • अनिवार्य वर्चुअल मोड: सोमवार, शुक्रवार और अन्य ‘पार्शियल वर्किंग डे’ पर केवल ऑनलाइन सुनवाई होगी।

  • हाइब्रिड मोड: मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को वकील और याचिकाकर्ता चाहें तो शारीरिक रूप से उपस्थित हो सकते हैं या वर्चुअल मोड चुन सकते हैं।


मिसाल पेश करेंगे जज: करेंगे ‘कारपूलिंग’

केवल सुनवाई ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट के जजों ने भी व्यक्तिगत स्तर पर ईंधन बचाने का संकल्प लिया है। जजों ने ‘सर्वसम्मति’ से निर्णय लिया है कि वे अदालत आने के लिए कारपूलिंग (Car-pooling) व्यवस्था को प्रोत्साहित करेंगे। यानी अब न्यायाधीश अपनी अलग-अलग गाड़ियों के बजाय एक साथ यात्रा करेंगे ताकि ईंधन की खपत कम की जा सके।


रजिस्ट्री स्टाफ के लिए नई गाइडलाइंस

अदालत के प्रशासनिक काम को सुचारू रखने के लिए रजिस्ट्री विभाग में भी बड़े बदलाव किए गए हैं:

  • 50% वर्क फ्रॉम होम: प्रत्येक शाखा के 50% कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन घर से काम करने की अनुमति दी गई है।

  • रोस्टर प्रणाली: इसके लिए एक साप्ताहिक रोस्टर तैयार किया जाएगा ताकि अदालत की कार्यक्षमता प्रभावित न हो।


इस फैसले को पर्यावरणविदों और आम जनता द्वारा व्यापक रूप से सराहा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस कदम से न केवल हजारों लीटर ईंधन की बचत होगी, बल्कि परिवहन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी आएगी।


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