हिमाचल प्रदेश में नशे पर ‘जीरो टॉलरेंस’: CM सुक्खू का बड़ा प्रहार, नशे में लिप्त 31 सरकारी कर्मचारी बर्खास्त

11/05/2026-VIDYA SAGAR
शिमला:
हिमाचल प्रदेश को ‘नशामुक्त’ बनाने की दिशा में कड़े कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने ड्रग माफिया और नशे में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। सोमवार को हिमाचल प्रदेश राज्य सचिवालय में नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 7वीं राज्य स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं।
बैठक के प्रमुख फैसले और निर्देश
नशे के बढ़ते खतरे (खासकर ‘चिट्टा’) से निपटने के लिए मुख्यमंत्री ने बहुआयामी रणनीति का खाका पेश किया:
-
सरकारी कर्मियों पर गिरी गाज: मादक पदार्थों की तस्करी और नशे में संलिप्त पाए जाने पर 31 सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है, जिनमें 21 पुलिसकर्मी और 10 अन्य विभागों के कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा 123 कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है।
-
नौकरी और एडमिशन के लिए ‘एंटी-चिट्टा’ टेस्ट: राज्य सरकार ने सभी सरकारी विभागों में नई भर्तियों और व्यावसायिक कॉलेजों (Professional Colleges) में दाखिले के लिए ‘एंटी-चिट्टा टेस्ट’ अनिवार्य कर दिया है।
-
अधिकारियों की परफॉरमेंस की होगी ग्रेडिंग: अब राज्य के सभी उपायुक्तों (DCs) और पुलिस अधीक्षकों (SPs) की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) में नशे के खिलाफ उनके प्रदर्शन के आधार पर ‘न्यूमेरिकल ग्रेडिंग’ दी जाएगी।
-
सख्त जांच और जब्ती: मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि चिट्टे के मामलों की फोरेंसिक रिपोर्ट 5 दिन के भीतर तैयार की जाए ताकि मुकदमों में तेजी आए। इसके अलावा, नशा तस्करों की अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चलाने और उन्हें कुर्क करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
एंटी-चिट्टा अभियान (Phase-II) का होगा आगाज
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि 1 जून से 20 अगस्त 2026 तक राज्य के सभी सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में ‘एंटी-चिट्टा जागरूकता अभियान’ का दूसरा चरण चलाया जाएगा। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधिकार क्षेत्र के कम से कम 10 शिक्षण संस्थानों का व्यक्तिगत रूप से दौरा कर छात्रों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें।
“यह केवल नशे की समस्या नहीं है, बल्कि यह हमारे युवाओं, परिवारों, सामाजिक संरचना और हिमाचल प्रदेश के भविष्य पर सीधा हमला है। इस लड़ाई में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितने भी ऊंचे पद पर क्यों न हो।” — ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश
पुनर्वास की दिशा में अहम कदम
सरकार केवल सख्त कार्रवाई ही नहीं कर रही है, बल्कि नशे के चंगुल में फंसे युवाओं को मुख्यधारा में लाने का भी प्रयास कर रही है। शिमला जिले के मशोबरा में 20 मई से एक नया पुनर्वास केंद्र (Rehabilitation Centre) शुरू किया जा रहा है। इसके अलावा, डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय (टांडा) में भी जल्द ही एक और केंद्र कार्यशील होगा।



