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हरित ऊर्जा की राह पर हिमाचल

CM सुक्खू का विजन, 90% बिजली नवीकरणीय स्रोतों से पैदा करने का लक्ष्य

27/04/2026-VIDYA SAGAR

सौर और जलविद्युत परियोजनाओं को मिली रफ्तार; ‘ग्रीन स्टेट’ बनने की ओर अग्रसर देवभूमि

शिमला | हिमाचल प्रदेश को देश का पहला ‘हरित ऊर्जा राज्य’ (Green Energy State) बनाने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश की ऊर्जा नीति में बड़े बदलावों की शुरुआत की है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि निकट भविष्य में प्रदेश की कुल 13,000 मिलियन यूनिट ऊर्जा खपत का 90 प्रतिशत हिस्सा सौर और जलविद्युत जैसे नवीकरणीय स्रोतों से पूरा किया जाए।


पनबिजली क्षेत्र में नया उत्साह: छोटी परियोजनाओं पर जोर

मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद राज्य में 5 मेगावाट क्षमता तक की छोटी जलविद्युत परियोजनाओं के विकास में अभूतपूर्व तेजी आई है।

  • उपलब्धि: पिछले तीन वर्षों में 17.25 मेगावाट की 7 परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं और 23.80 मेगावाट की 12 परियोजनाओं का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।

  • भविष्य की योजना: 47.90 मेगावाट की 18 नई परियोजनाएं स्वीकृति की कगार पर हैं। साथ ही, 75 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं के लिए 76 नए आवेदन प्रक्रिया के अधीन हैं।

सौर ऊर्जा: रिकॉर्ड समय में पूरे हो रहे प्रोजेक्ट

राज्य सरकार ने सौर ऊर्जा को ग्रामीण और औद्योगिक विकास का आधार बनाया है:

  • सोलर पार्क: प्रदेश में 501 मेगावाट क्षमता के 5 सौर ऊर्जा पार्क स्थापित किए जा रहे हैं।

  • कांगड़ा का डमटाल प्लांट: यहाँ 200 मेगावाट क्षमता का विशाल सौर ऊर्जा संयंत्र बंजर भूमि पर स्थापित किया जाएगा।

  • सफल प्रोजेक्ट्स: पेखूबेला, भंजाल और अघलौर सौर परियोजनाओं को रिकॉर्ड समय में पूरा कर विद्युत उत्पादन शुरू कर दिया गया है।


‘ग्रीन पंचायत’: अनाथ बच्चों और विधवाओं को मिलेगा सहारा

हिमाचल सरकार ने एक अनूठी ‘ग्रीन पंचायत कार्यक्रम’ की शुरुआत की है। इसके तहत:

  • पंचायतों में 500 किलोवाट की सौर परियोजनाएं लगाई जा रही हैं।

  • इन परियोजनाओं से होने वाली आय का 20 प्रतिशत राजस्व ग्राम पंचायत के अनाथ बच्चों और विधवा महिलाओं की आर्थिक सहायता के लिए खर्च किया जाएगा।


वैकल्पिक ऊर्जा और नई तकनीक: ग्रीन हाइड्रोजन व बायोगैस

हिमाचल प्रदेश अब पारंपरिक ऊर्जा से आगे बढ़कर अत्याधुनिक तकनीकों को अपना रहा है:

  1. ग्रीन हाइड्रोजन: चंबा में पहला ग्रीन हाइड्रोजन आधारित मोबिलिटी स्टेशन और नालागढ़ में 1 मेगावाट का संयंत्र स्थापित हो रहा है।

  2. बायोचार संयंत्र: हमीरपुर के नेरी में देश का पहला राज्य समर्थित बायोचार संयंत्र स्थापित किया जा रहा है।

  3. बैटरी स्टोरेज: चंबा की पांगी घाटी जैसे दुर्गम क्षेत्रों में निर्बाध बिजली के लिए ‘बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम’ लगाए जा रहे हैं।


निवेशकों के लिए ‘पहले आओ-पहले पाओ’ की नीति

पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने सौर परियोजनाओं के आवंटन में ‘First Come – First Serve’ नीति अपनाई है। अब तक 547 निवेशकों को लगभग 596 मेगावाट की परियोजनाएं आवंटित की गई हैं। उत्पादित बिजली को राज्य विद्युत बोर्ड द्वारा खरीदा जाएगा, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे।


मुख्यमंत्री का संदेश: > “हिमाचल ऊर्जा आत्मनिर्भरता का पथ प्रदर्शक बनेगा। हमारा प्रयास है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक सटीक संतुलन बनाकर राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त किया जाए।”

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