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हिमाचल के स्वर्णिम भविष्य का आधार: प्राकृतिक खेती और सुदृढ़ ग्रामीण अर्थव्यवस्था

मुख्यमंत्री सुक्खू ने बागवानी विश्वविद्यालय को दी ₹34.31 करोड़ की सौगात; बुनियादी ढांचे और किसान कल्याण पर दिया जोर।

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27/04/2026-VIDYA SAGAR

CM सुक्खू ने बागवानी विश्वविद्यालय के लिए ₹34.31 करोड़ की परियोजनाओं का किया लोकार्पण एवं शिलान्यास

शिमला/सोलन हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज प्रदेश में कृषि और बागवानी के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करते हुए डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के लिए 34.31 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने शिमला से वर्चुअल माध्यम के जरिए इन परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।


बुनियादी ढांचे को मजबूती: नए छात्रावासों का तोहफा

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों और कामकाजी महिलाओं की सुविधा के लिए कई महत्वपूर्ण भवनों का लोकार्पण किया:

  • नेरी (हमीरपुर): 3.63 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 107 छात्रों की क्षमता वाले छात्रावास का उद्घाटन।

  • ताबो (लाहौल-स्पीति): 1.48 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित कृषि विज्ञान केंद्र के प्रशासनिक भवन का उद्घाटन।

  • वर्किंग वुमन हॉस्टल: नेरी, खग्गल (हमीरपुर) और मुख्य परिसर नौणी (सोलन) में कुल 29.2 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले तीन नए वर्किंग वुमन हॉस्टल्स का शिलान्यास किया गया।

प्राकृतिक खेती: “विश्वविद्यालय निभाएं बड़ी भूमिका”

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को ‘प्राकृतिक खेती राज्य’ के रूप में विकसित करना सरकार का मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:

“विश्वविद्यालयों की यह जिम्मेदारी है कि वे किसानों को आधुनिक और प्राकृतिक खेती की तकनीकों से जोड़ें। राज्य की 90% आबादी ग्रामीण है और 53% लोग प्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर हैं। जब तक किसान समृद्ध नहीं होगा, राज्य प्रगति नहीं कर सकता।”

वर्तमान में प्रदेश में 2 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती के लिए पंजीकृत हैं, जिनमें से 1.98 लाख को प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं।


देश में सबसे अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)

हिमाचल सरकार ने प्राकृतिक खेती को लाभ का सौदा बनाने के लिए फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भारी वृद्धि की है:

फसल पुराना मूल्य (प्रति किलो) नया समर्थन मूल्य (प्रति किलो)
गेहूं (प्राकृतिक) ₹60 ₹80
मक्की ₹40 ₹50
जौ (पांगी घाटी) ₹60 ₹80
हल्दी ₹90 ₹150
अदरक (पहली बार) ₹30

इसके अलावा, पशुपालकों को राहत देते हुए गाय के दूध का मूल्य ₹61 और भैंस के दूध का मूल्य ₹71 प्रति लीटर निर्धारित किया गया है।


पांगी बना पहला ‘प्राकृतिक खेती उप-मंडल’

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पांगी को राज्य का पहला पूर्णतः प्राकृतिक खेती उप-मंडल घोषित किया गया है। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान बंद करने के बावजूद, प्रदेश सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बजट की कमी नहीं होने देगी।

इस वर्चुअल कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजेश्वर चंदेल, रजिस्ट्रार सिद्धार्थ आचार्य और आईसीएआर के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. आर.के. सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


संपादकीय टिप्पणी: यह कदम हिमाचल को रसायन मुक्त खेती की दिशा में अग्रणी राज्य बनाने और ग्रामीण युवाओं को कृषि की ओर पुनः आकर्षित करने में मील का पत्थर साबित होगा।

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