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हिमाचल में पंचायत चुनावों का बिगुल

इस सप्ताह लागू हो सकती है आचार संहिता, पंचायतों के लिए ₹25 लाख के इनाम की घोषणा

24/04/2026-VIDYA SAGAR

शिमला | हिमाचल प्रदेश में स्थानीय सरकार यानी पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राज्य चुनाव आयोग और प्रदेश सरकार की तैयारियों को देखते हुए माना जा रहा है कि इस सप्ताह के अंत तक चुनाव आचार संहिता लागू की जा सकती है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने इस बार चुनावों को लेकर एक बड़ा दांव खेला है, जिससे ग्रामीण राजनीति में उत्साह का माहौल है।

निर्विरोध चयन पर ₹25 लाख का बंपर इनाम

प्रदेश सरकार ने ग्रामीण विकास और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जो भी ग्राम पंचायत निर्विरोध (unanimously) चुनी जाएगी, उसे विकास कार्यों के लिए सरकार की ओर से ₹25 लाख की विशेष अनुदान राशि दी जाएगी। इस कदम का उद्देश्य गांवों में चुनावी रंजिश को कम करना और विकास की गति को तेज करना है।

चुनावी तैयारियों का खाका

राज्य चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इस बार के चुनावों में निम्नलिखित बिंदु महत्वपूर्ण रहेंगे:

  • रोस्टर और आरक्षण: महिला, अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटों का रोस्टर जिला स्तर पर जारी किया जा रहा है।

  • डिजिटल मॉनिटरिंग: चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए इस बार तकनीकी का अधिक उपयोग किया जाएगा।

  • आचार संहिता: अधिसूचना जारी होते ही विकास कार्यों के शिलान्यास और नई घोषणाओं पर रोक लग जाएगी।


प्रमुख जानकारी: एक नज़र में

विवरण अपडेट
आचार संहिता की संभावना इस सप्ताह के अंत तक
विशेष पुरस्कार निर्विरोध पंचायत को ₹25 लाख
मतदान का माध्यम बैलेट पेपर / ईवीएम (आयोग के निर्देशानुसार)
मुख्य फोकस ग्रामीण विकास और महिला सशक्तीकरण

विपक्ष की पैनी नजर

दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार को घेरे हुए कहा है कि सरकार चुनाव टालने की कोशिश न करे और निष्पक्ष तरीके से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पूरा होने दे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कई पंचायतों के विकास फंड रोक रखे हैं, जिसका असर चुनावों पर पड़ सकता है।

निष्कर्ष

हिमाचल प्रदेश की ग्रामीण राजनीति के लिए अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं। ₹25 लाख के प्रोत्साहन ने कई गांवों में सर्वसम्मति बनाने की कोशिशें शुरू करवा दी हैं। अब देखना यह है कि कितनी पंचायतें इस इनाम को जीतकर विकास का नया मॉडल पेश करती हैं।

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