हिमाचल में उद्योगों को अब 25 वर्षों तक मिलेगा सहमति प्रमाण पत्र: सुक्खू सरकार की ऐतिहासिक पहल, ‘स्पीड ऑफ डूइंग बिजनेस’ को मिलेगी नई रफ्तार
राज्य के 12,500 से अधिक पंजीकृत उद्योगों को मिलेगी बार-बार चक्कर काटने से मुक्ति; 'वन टाइम' सहमति प्रमाण पत्र देने वाला देश का अग्रणी राज्य बना हिमाचल प्रदेश

VIDYA SAGAR
शिमला, 31 जुलाई 2026
हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने और व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। प्रदेश सरकार की इस नवीन पहल के तहत हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अब पंजीकृत उद्योगों को ‘वन टाइम’ (One Time) सहमति प्रमाण पत्र (Consent Certificate) जारी करेगा, जिसकी वैधता अवधि 5 से लेकर 25 वर्षों तक होगी।
12,500 उद्योगों को मिलेगी सीधी राहत
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बताया कि राज्य में वर्तमान में लगभग 12,500 उद्योग पंजीकृत हैं, जिन्हें अब तक बार-बार अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। इस व्यवस्था परिवर्तन से उद्योगों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा:-
“हमारी सरकार ‘स्पीड ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Speed of Doing Business) के नए ध्येय के साथ काम कर रही है। इससे ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ दोनों को मजबूती मिलेगी। उद्यमियों का समय और श्रम बचेगा तथा रेड टेपिस्म (अफसरशाही की लालफीताशाही) पर अंकुश लगेगा।”
पारदर्शिता, समयसीमा और अधिकारियों की जवाबदेही तय
प्रदेश सरकार ने इस व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
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वर्गीकरण आधारित समयसीमा: उद्योगों की क्षमता और श्रेणी के आधार पर एनओसी जारी करने की समयसीमा तय की गई है। समय पर प्रमाण पत्र न मिलने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
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क्षेत्रीय अधिकारियों को शक्तियां: अधीनस्थ कार्यालयों और क्षेत्रीय अधिकारियों को वित्तीय व नियामक शक्तियां दी गई हैं, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी।
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अनावश्यक बिजली कटौती पर रोक: तकनीकी या मामूली खामियों के कारण अचानक बिजली काटे जाने से उद्योगों की कार्यक्षमता प्रभावित होती थी, जिस पर अब लगाम लगेगी।
ऑनलाइन प्रणाली में सुधार और 70% लिपिकीय काम कम
हिमाचल प्रदेश ‘वन टाइम’ सहमति प्रमाण पत्र प्रणाली लागू करने वाला देश का अग्रणी राज्य बन गया है। इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से पारदर्शी बनाया गया है।
इस नई व्यवस्था के लागू होने से राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में लगभग 70 प्रतिशत लिपिकीय (Clerical) कार्य कम होगा, जिससे कर्मचारियों की कार्यकुशलता बढ़ेगी और बची हुई श्रम शक्ति का उपयोग अन्य महत्वपूर्ण विकास कार्यों में किया जा सकेगा।



