हिमाचल सरकार का कड़ा रुख: SJVNL से वापस ली जाएंगी सुन्नी, लुहरी और धौलासिद्ध जलविद्युत परियोजनाएं
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने दिए प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश; किशाऊ बांध का 8 साल पुराना गतिरोध भी समाप्त, राज्य को हर साल होगी 600 करोड़ रुपये की आय

VIDYA SAGAR
शिमला, 02 जुलाई, 2026
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हिमाचल प्रदेश के जलविद्युत संसाधनों (Hydro Power Resources) पर राज्य के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने एक बड़ा और नीतिगत निर्णय लिया है। शिमला में आयोजित ऊर्जा विभाग की एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पूर्व में ‘सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड’ (SJVNL) को आवंटित की गईं तीन प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं को वापस लेने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार प्राकृतिक संसाधनों से प्रदेश का उचित हिस्सा हासिल करने और जनहित में इनके बेहतर इस्तेमाल को सुनिश्चित करने की दिशा में पूरी प्रतिबद्धता से आगे बढ़ रही है।

SJVNL से वापस ली जाने वाली परियोजनाएं
सरकार द्वारा वापस ली जा रही इन तीन परियोजनाओं की कुल क्षमता 658 मेगावाट है। बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार इन परियोजनाओं का विवरण इस प्रकार है:
| क्र.सं. | परियोजना का नाम | क्षमता (मेगावाट) | पूर्व आवंटित एजेंसी |
| 1. | सुन्नी जलविद्युत परियोजना | 382 MW | SJVNL |
| 2. | लुहरी जलविद्युत परियोजना (चरण-1) | 210 MW | SJVNL |
| 3. | धौलासिद्ध जलविद्युत परियोजना | 66 MW | SJVNL |
“जलविद्युत हिमाचल की अर्थव्यवस्था की रीढ़” — मुख्यमंत्री
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री सुक्खू ने राज्य के संसाधनों पर स्थानीय जनता के हक को रेखांकित किया।
“जलविद्युत हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। हमारी सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के इस समृद्ध प्राकृतिक संसाधन का अधिकतम लाभ यहां की जनता तक पहुंचाना सुनिश्चित करना है। वर्तमान सरकार प्रदेशवासियों के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर प्रतिबद्ध है और संशोधित नियमों के तहत ही आगामी कदम उठाए जाएंगे।”
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डुग्गर परियोजना की शर्तों पर दोबारा होगी बातचीत
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को एनएचपीसी (NHPC) द्वारा विकसित की जा रही 500 मेगावाट की डुग्गर जलविद्युत परियोजना के नियमों और शर्तों पर भी दोबारा मोलभाव (Negotiation) करने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, एनएचपीसी ने इस परियोजना में बांध की ऊंचाई बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। ऐसे में राज्य सरकार संशोधित परियोजना के अनुरूप हिमाचल प्रदेश के लिए अधिक और उचित लाभ सुनिश्चित करने का हर संभव प्रयास करेगी।
किशाऊ बांध परियोजना: 8 साल पुराना गतिरोध खत्म
राज्य सरकार को एक और बड़ी सफलता 422 मेगावाट की किशाऊ बांध परियोजना में मिली है, जहां पिछले आठ वर्षों से लंबित गतिरोध को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
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शून्य निवेश: नई व्यवस्था के तहत हिमाचल प्रदेश को इस परियोजना में कोई पूंजी निवेश (Capital Investment) नहीं करना होगा।
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मुफ्त बिजली: निवेश न करने के बावजूद राज्य को इस परियोजना से 211 मेगावाट मुफ्त बिजली प्राप्त होगी।
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राजस्व में बढ़ोतरी: इस ऐतिहासिक समझौते से प्रदेश सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 600 करोड़ रुपये की निश्चित आय होने का अनुमान है।
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बैठक में उपस्थित रहे आला अधिकारी
इस अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार, सचिव (ऊर्जा) राकेश कंवर, निदेशक ऊर्जा राकेश प्रजापति तथा एचपीपीसीएल (HPPCL) के प्रबंध निदेशक आबिद हुसैन सादिक सहित ऊर्जा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।



