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⚖️ राघव चड्ढा को हाई कोर्ट से बड़ा झटका: ट्रोलिंग और कार्टून्स मामले में अंतरिम राहत देने से इनकार

लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी पर कोर्ट की बड़ी टिप्पणी: "नेताओं पर व्यंग्य और आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा, इसे रोका नहीं जा सकता।"

22/05/2026-VIDYA SAGAR

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर हो रही लगातार ट्रोलिंग, मीम्स और व्यंग्यात्मक कार्टून्स के प्रसारण पर रोक लगाने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने उन्हें किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया।

मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा रुख अपनाया है।


🗣️ “नेताओं की आलोचना लोकतंत्र का मूल हिस्सा” – दिल्ली हाई कोर्ट

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सार्वजनिक जीवन या राजनीति में रहने वाले व्यक्तियों को जनता की आलोचना और व्यंग्य का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा:-

“लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनेताओं पर कार्टून्स के जरिए व्यंग्य करना या उनकी नीतियों की आलोचना करना कोई नई बात नहीं है। यह अभिव्यक्ति की आजादी और जीवंत लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब तक कोई सामग्री पूरी तरह से मानहानि या कानून के दायरे से बाहर न हो, तब तक इस तरह की आलोचनात्मक टिप्पणियों या कार्टून्स पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।”


📱 क्या था पूरा मामला?

सांसद राघव चड्ढा ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुछ विशेष हैंडलर्स द्वारा उन्हें निशाना बनाकर अपमानजनक कार्टून्स, मीम्स और भ्रामक सामग्रियां पोस्ट की जा रही हैं। याचिका में मांग की गई थी कि उनकी छवि को धूमिल होने से बचाने के लिए कोर्ट इन सामग्रियों और संबंधित अकाउंट्स पर अंतरिम रोक (Injunction) लगाने का आदेश जारी करे।

हालांकि, हाई कोर्ट ने उनकी दलीलों को पर्याप्त नहीं माना और राहत देने से मना कर दिया, जिससे अब सोशल मीडिया पर उन पर बनने वाले राजनीतिक व्यंग्य जारी रह सकेंगे।


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