हिमाचल की बेटी ने रचा इतिहास: कर्नल सपना राणा बनीं आर्मी बटालियन कमांड करने वाली प्रदेश की पहली महिला अधिकारी
संघर्षों से भरा रहा शुरुआती सफर

11/05/2026-VIDYA SAGAR
शिमला/सोलन।
हिमाचल प्रदेश, जिसे वीरों की भूमि ‘देवभूमि’ कहा जाता है, के नाम आज एक और स्वर्णिम उपलब्धि जुड़ गई है। सोलन जिले के एक छोटे से गांव भवानीपुर की बेटी, कर्नल सपना राणा ने भारतीय सेना में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वह हिमाचल प्रदेश की पहली ऐसी महिला अधिकारी बन गई हैं, जिन्हें सेना की एक पूरी बटालियन को कमांड (नेतृत्व) करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वर्तमान में वह देश के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण नॉर्थ-ईस्ट (उत्तर-पूर्वी) क्षेत्र में आर्मी सर्विस कोर (ASC) की बटालियन का नेतृत्व कर रही हैं।
संघर्षों से भरा रहा शुरुआती सफर
कर्नल सपना का यहाँ तक पहुँचने का रास्ता फूलों की सेज नहीं था। एक शिक्षक (राजेंद्र ठाकुर) और गृहिणी (कृष्णा ठाकुर) के घर जन्मी सपना ने बचपन में गांव की कठिन परिस्थितियों में काम किया। वह खेतों में हाथ बंटाती थीं, मवेशियों का दूध निकालती थीं और चूल्हे पर खाना भी बनाती थीं। लेकिन उनकी आंखों में देश सेवा का एक बड़ा सपना था, जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत का रास्ता चुना।
शिक्षा और सेना में प्रवेश
सपना की शुरुआती शिक्षा चंडी और सोलन में हुई। उन्होंने राजकीय स्नातकोत्तर कॉलेज, सोलन से बी.कॉम की डिग्री हासिल की और इसके बाद हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी (HPU), शिमला से MBA किया।
NCC का जुनून: कॉलेज के दिनों में वह NCC की ‘सीनियर अंडर ऑफिसर’ रहीं और कारगिल विजय कैंप के लिए चुनी जाने वाली हिमाचल की इकलौती कैडेट बनीं।
CDS परीक्षा: शुरुआत में वह सिविल सेवा की तैयारी करना चाहती थीं, लेकिन बीच में ही उन्होंने कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) की परीक्षा दी और सफल रहीं।
कमीशन: साल 2003 में उन्होंने ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA), चेन्नई जॉइन की और 2004 में भारतीय सेना में बतौर लेफ्टिनेंट कमीशन प्राप्त किया।
उपलब्धियों का सिलसिला
कर्नल सपना न केवल एक कुशल सैन्य अधिकारी हैं, बल्कि एक बेहतरीन एथलीट और निशानेबाज भी हैं:
स्वर्ण पदक विजेता: ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने क्रॉस-कंट्री और बाधा दौड़ (Obstacle Training) में गोल्ड मेडल जीते।
नेशनल शूटर: वह आर्मी की शूटिंग टीम का हिस्सा रही हैं और नेशनल लेवल पर पिस्टल व ट्रैप शूटिंग में पदक जीत चुकी हैं।
सम्मान: उनकी उत्कृष्ट सेवा के लिए उन्हें अब तक तीन बार सेना प्रमुख (COAS) और जीओसी-इन-सी (GOC-in-C) कमेंडेशन कार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
नारी शक्ति की मिसाल
कर्नल सपना राणा की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे हिमाचल के लिए गर्व का विषय है। एक ऐसी महिला जो कभी कॉलेज जाने के पैसे बचाने के लिए मीलों पैदल चलती थी, आज सेना की टुकड़ी को आदेश दे रही है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि अगर संकल्प मजबूत हो, तो गांव की पगडंडियों से निकलकर भी सफलता के एवरेस्ट पर कब्जा किया जा सकता है।



