तमिलनाडु में ‘विजय-राज’ का आगाज़: थलपति विजय बने मुख्यमंत्री, शपथ ग्रहण के साथ ही विवाद शुरू
वंदे मातरम पर सियासी रार शपथ ग्रहण समारोह के दौरान जैसे ही 'वंदे मातरम' की धुन बजाई गई, समारोह में मौजूद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी

VIDYA SAGAR
[चेन्नई • 11 मई, 2026]
मुख्य समाचार: तमिलनाडु की राजनीति में आज एक नए युग की शुरुआत हुई है। दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के प्रमुख थलपति विजय ने आज तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। चेन्नई में आयोजित एक भव्य समारोह में राज्यपाल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। हालाँकि, यह ऐतिहासिक पल विवादों से अछूता नहीं रहा।
वंदे मातरम पर सियासी रार शपथ ग्रहण समारोह के दौरान जैसे ही ‘वंदे मातरम’ की धुन बजाई गई, समारोह में मौजूद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के नेताओं ने इस पर कड़ा विरोध जताया। CPI का तर्क है कि तमिलनाडु की परंपराओं और क्षेत्रीय पहचान के बीच ‘वंदे मातरम’ को प्राथमिकता देना भाषाई और सांस्कृतिक राजनीति का हिस्सा है। इस विरोध ने समारोह के गरिमामय माहौल में राजनीतिक तनाव पैदा कर दिया।
सिनेमा से सत्ता तक का सफर थलपति विजय, जिनका राज्य में विशाल प्रशंसक आधार है, ने अपनी पार्टी के गठन के साथ ही भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और ‘तमिल गौरव’ का वादा किया था। मुख्यमंत्री बनने के साथ ही उन्होंने राज्य की राजनीति में दशकों से चले आ रहे DMK और AIADMK के वर्चस्व को सीधी चुनौती दी है।
शपथ ग्रहण के मुख्य अंश:
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भव्य आयोजन: समारोह में फिल्मी जगत की दिग्गज हस्तियों के साथ-साथ कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए।
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पहली घोषणा: मुख्यमंत्री पद संभालते ही विजय ने युवाओं के लिए रोज़गार और शिक्षा नीति में सुधार से जुड़ी फाइलों पर हस्ताक्षर किए।
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विपक्ष का रुख: जहाँ समर्थकों में भारी उत्साह है, वहीं CPI और अन्य सहयोगियों के विरोध ने भविष्य के गठबंधन और वैचारिक मतभेदों की ओर इशारा कर दिया है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का आकलन जानकारों का मानना है कि विजय के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी कांटों भरा ताज साबित हो सकती है। एक तरफ उन्हें अपने प्रशंसकों की उम्मीदों पर खरा उतरना है, तो दूसरी तरफ ‘वंदे मातरम’ जैसे प्रतीकात्मक मुद्दों पर सहयोगियों के विरोध को संभालना उनके राजनीतिक कौशल की पहली परीक्षा होगी।



