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मितव्ययिता की मिसाल: पश्चिम एशिया संकट के बीच हिमाचल राज्यपाल का बड़ा फैसला, अब हेलीकॉप्टर नहीं, ‘ईंधन बचत’ पर जोर

संकट के समय 'संसाधन संरक्षण' का संदेश

14/05/2026-VIDYA SAGAR

शिमला – वैश्विक स्तर पर गहराते पश्चिम एशिया संकट और इसके परिणामस्वरूप ईंधन की कीमतों व आपूर्ति पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को देखते हुए, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने सादगी और मितव्ययिता की एक नई मिसाल पेश की है। राजभवन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्यपाल ने राज्य के भीतर आधिकारिक दौरों के लिए अपने सरकारी हेलीकॉप्टर का उपयोग सीमित करने या न करने का निर्णय लिया है।


यह कदम ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की चर्चा हो रही है। राज्यपाल का यह निर्णय न केवल सरकारी खजाने पर बोझ कम करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देगा।


संकट के समय ‘संसाधन संरक्षण’ का संदेश

राज्यपाल सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति में अस्थिरता की स्थिति बनी हुई है। राज्यपाल का मानना है कि एक जिम्मेदार संवैधानिक पद पर रहते हुए, फिजूलखर्ची को रोकना और ईंधन की बचत करना समय की मांग है।


“जब पूरी दुनिया ऊर्जा संकट और पर्यावरण की चुनौतियों से जूझ रही है, तब यह हमारा कर्तव्य है कि हम उपलब्ध संसाधनों का संयम से उपयोग करें। ‘मितव्ययिता’ केवल शब्दों में नहीं, बल्कि हमारे आचरण में दिखनी चाहिए।” – राजभवन सूत्र


मुख्य आकर्षण: राज्यपाल की ‘ग्रीन’ पहल

  • हेलीकॉप्टर के बजाय सड़क मार्ग: राज्यपाल अब महत्वपूर्ण दौरों के लिए हेलीकॉप्टर के बजाय सड़क मार्ग या न्यूनतम वाहनों के काफिले का उपयोग करेंगे।

  • ईंधन की भारी बचत: हेलीकॉप्टर के एक घंटे के उड़ान का खर्च लाखों में होता है; इस निर्णय से प्रदेश के राजस्व की बड़ी बचत होगी।

  • रविवार को ‘पेट्रोल-मुक्त’ राजभवन: इससे पहले भी राज्यपाल ने राजभवन परिसर में प्रत्येक रविवार को पेट्रोल-डीजल वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाकर ‘नो-व्हीकल डे’ की शुरुआत की थी।


प्रशासन और जनता के लिए प्रेरणा

राजनीतिक विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों ने राज्यपाल के इस कदम की सराहना की है। जानकारों का कहना है कि जब उच्च पदों पर बैठे व्यक्ति इस तरह के त्याग करते हैं, तो इसका सीधा असर शासन व्यवस्था और आम जनता की मानसिकता पर पड़ता है। यह निर्णय राज्य सरकार के अन्य विभागों के लिए भी एक बेंचमार्क स्थापित कर सकता है कि कैसे संकट के समय में प्रशासनिक खर्चों में कटौती की जाए।


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