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प्राकृतिक खेती से हिमाचल में आत्मनिर्भर हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था; इस वर्ष 63,000 किसानों से खरीदी जाएगी उपज

99.3% ग्राम पंचायतों तक पहुँचा अभियान, MSP देने वाला पहला राज्य

16/05/2026-VIDYA SAGAR

शिमला। हिमाचल प्रदेश में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘राजीव गांधी प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना’ ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक संजीवनी साबित हो रही है। वर्तमान में जलवायु परिवर्तन, लगातार बढ़ती कृषि लागत, मिट्टी की घटती उपजाऊ क्षमता और जंगली जानवरों के डर के बीच, यह योजना प्रदेश के हजारों किसानों और बागवानों के लिए एक बेहद लाभकारी और टिकाऊ विकल्प बनकर उभरी है।


इस मुहिम को और बड़ा रूप देते हुए कृषि विभाग ने इस वर्ष प्रदेश के लगभग 63,000 किसानों से प्राकृतिक खेती की उपज खरीदने का विशाल लक्ष्य निर्धारित किया है।


99.3% ग्राम पंचायतों तक पहुँचा अभियान, MSP देने वाला पहला राज्य

हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करने वाला देश का पहला राज्य बन चुका है। सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले ने किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से पूरी सुरक्षा दी है।


वर्तमान आंकड़ों पर नज़र डालें तो: –

  • 2,23,029 कृषक एवं बागवान परिवार अब तक पूर्ण या आंशिक रूप से प्राकृतिक खेती को अपना चुके हैं।

  • यह अभियान अब प्रदेश की 99.3 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक अपनी पैठ बना चुका है।


बजट 2026-27: प्राकृतिक फसलों के दामों में बंपर वृद्धि

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में राज्य सरकार ने प्राकृतिक खेती से उगाई जाने वाली फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में भारी बढ़ोतरी की है। वर्तमान में सरकार द्वारा तय की गई दरें इस प्रकार हैं:

फसल का नाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)
प्राकृतिक गेहूं ₹80 प्रति किलोग्राम
प्राकृतिक मक्की ₹50 प्रति किलोग्राम
कच्ची हल्दी ₹150 प्रति किलोग्राम
पांगी घाटी की जौ ₹80 प्रति किलोग्राम
प्राकृतिक अदरक ₹30 प्रति किलोग्राम

‘हिम परिवार रजिस्टर’ से जुड़ेंगे 1 लाख नए किसान

पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग ने इस वर्ष 1 लाख नए किसानों को हिम परिवार रजिस्टर से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। राहत की बात यह है कि अब तक 70,000 से अधिक किसान इससे जुड़ भी चुके हैं, जो कि तय लक्ष्य का लगभग 70 प्रतिशत है। इस डिजिटल पंजीकरण से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और बिना किसी बिचौलिये के किसानों तक पहुँच रहा है।


गेहूं की खरीद में बंपर उछाल

प्रदेश में प्राकृतिक गेहूं बेचने वाले किसानों की संख्या में भारी रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। पिछले वर्ष जहां केवल 838 किसानों ने सरकार को गेहूं बेचा था, वहीं इस वर्ष यह आंकड़ा ढाई गुना बढ़कर 2,022 किसानों तक पहुँच गया है।


“गांव की पूंजी, गांव की आर्थिकी में रहे” — मुख्यमंत्री सुक्खू

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि आने वाले सालों में MSP का लाभ उठाने वाले किसानों का दायरा और बढ़ाया जाए। मुख्यमंत्री का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि:-

सीधा लाभ: इस योजना के अंतर्गत अब तक 7,382 किसानों से 11,329 क्विंटल गेहूं, मक्की, हल्दी एवं जौ की खरीद की जा चुकी है, जिसके बदले किसानों के बैंक खातों में ₹6.40 करोड़ की राशि Direct Benefit Transfer (DBT) के माध्यम से सीधे ट्रांसफर की गई है।


वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग पर विशेष फोकस

सरकार केवल फसल खरीद ही नहीं रही, बल्कि उनके मूल्य संवर्धन (Value Addition) और विपणन (Marketing) पर भी काम कर रही है। पिछले वर्ष खरीदी गई उपज से तैयार निम्नलिखित उत्पादों को खाद्य आपूर्ति निगम और कृषि विभाग के माध्यम से बाजार में उतारा गया है:

  • 420 क्विंटल प्राकृतिक गेहूं का आटा

  • 1,370 क्विंटल पौष्टिक दलिया उत्पाद

  • 1,628 क्विंटल मक्की का आटा

  • 59 क्विंटल पांगी की जौ का आटा


निष्कर्ष: हिमाचल प्रदेश की यह पहल न केवल रसायनों से मुक्त स्वस्थ समाज का निर्माण कर रही है, बल्कि पारंपरिक खेती को एक सम्मानजनक और अत्यधिक मुनाफे वाले व्यवसाय के रूप में स्थापित कर रही है।


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