हिमाचल में ‘स्मार्ट शहरीकरण’ की तैयारी: ‘हिम चंडीगढ़’ और ‘हिम पंचकूला’ जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम शुरू
हिमाचल में 'स्मार्ट शहरीकरण' की तैयारी: 'हिम चंडीगढ़' और 'हिम पंचकूला' जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम शुरू

16/05/2026-VIDYA SAGAR
शिमला। हिमाचल प्रदेश में तीव्र शहरीकरण के दबाव को कम करने और संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। नगर एवं ग्राम नियोजन (TCP) मंत्री राजेश धर्माणी ने हिमाचल प्रदेश आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण (HIMUDA) की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश में सुनियोजित और भविष्य के अनुरूप (Future-Ready) शहरी केंद्रों को विकसित किया जा रहा है

उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमुडा की इन परियोजनाओं का उद्देश्य न केवल लोगों की आवासीय आवश्यकताओं को पूरा करना है, बल्कि राज्य के लिए राजस्व (Revenue) के नए और स्थायी स्रोत तैयार करना भी है।
‘हिम चंडीगढ़’ और ‘कांगड़ा वैली एयरोसिटी’ से बदलेगी प्रदेश की सूरत
शहरी विकास को राज्य की प्रगति का मुख्य स्तंभ बताते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर दूरदर्शी परियोजनाओं को धरातल पर उतारा जा रहा है।
मुख्य शहरी परियोजनाएं:
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हिम चंडीगढ़ व हिम पंचकूला: इन नए आधुनिक उप-नगरों को साकार रूप देने के लिए आपसी सहमति या लैंड पुलिंग (Land Pooling) नीति के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है।
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कांगड़ा वैली एयरोसिटी: इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जरिए कांगड़ा घाटी में पर्यटन और वाणिज्यिक गतिविधियों को नया विस्तार मिलेगा।
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सिरसा नदी तटीकरण विकास परियोजना: पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए सिरसा नदी के तटीकरण और उसके आसपास सुनियोजित विकास के लिए एक विशेष ब्लूप्रिंट तैयार किया जा रहा है।
हिमाचल में ‘स्मार्ट शहरीकरण’ की तैयारी: ‘हिम चंडीगढ़’ और ‘हिम पंचकूला’ जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम शुरू
बैठक के दौरान राजेश धर्माणी ने प्रदेश में नवाचार (Innovation) को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक नीति की घोषणा की। हिमुडा द्वारा अब ‘हिमुडा स्टार्ट-अप एंड स्टूडेंट इनोवेशन पॉलिसी’ को लागू किया जा रहा है।
नीति की मुख्य बातें: > * इस नीति के तहत प्रदेश के युवाओं और छात्रों के बेहतरीन स्टार्टअप आइडिया को प्रति प्रस्ताव ₹5 लाख की फंडिंग दी जाएगी।
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इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में एक मजबूत बिजनेस इकोसिस्टम बनाना है, जिससे आर्थिक विकास को गति मिले और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हों।
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हिमाचल की संवेदनशील भौगोलिक स्थिति को देखते हुए, आपदा प्रबंधन (Disaster Management) से जुड़े स्टार्टअप्स को इस नीति के तहत विशेष प्राथमिकता और फंडिंग देने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
HIMUDA होगा पूरी तरह डिजिटल: घर बैठे मिलेंगी सुविधाएं
सूचना प्रौद्योगिकी (IT) का लाभ सीधे जनता तक पहुंचाने के लिए हिमुडा अपने पूरे सिस्टम को अपग्रेड करने जा रहा है। हिमुडा के एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के तहत जल्द ही ई-इनिशिएटिव मॉडल (e-Initiative Model) लागू किया जाएगा।
इस डिजिटल सुधार के बाद सभी हितधारकों और आम जनता को निम्नलिखित सुविधाएं ऑनलाइन मिलेंगी:
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ऑनलाइन आवंटन (Online Allotment): आवास या भूखंडों का आवंटन पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी होगा।
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ई-ड्राइंग (e-Drawing): योजनाओं के नक्शे और लेआउट डिजिटल रूप से उपलब्ध होंगे।
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ई-ऑक्शन (e-Auction): संपत्तियों की नीलामी के लिए ई-ऑक्शन की सुविधा मिलेगी, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
क्षमता निर्माण और विशेषज्ञों की तैनाती
नागरिकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं और बेहतरीन कंस्ट्रक्शन क्वालिटी देने के लिए प्राधिकरण अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के निरंतर क्षमता निर्माण (Capacity Building) पर काम कर रहा है। इसके तहत स्टाफ को आधुनिक ट्रेनिंग दी जा रही है। साथ ही, शहरी नियोजन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए देश के विभिन्न विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) को हिमुडा के साथ इम्पैनलड (सूचीबद्ध) किया जा रहा है।
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में हिमुडा के उपाध्यक्ष यशवंत छाजटा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं सचिव डॉ. सुरेन्द्र कुमार वशिष्ठ सहित प्राधिकरण के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
निष्कर्ष: राज्य सरकार की यह पहल दर्शाती है कि हिमाचल प्रदेश अब केवल पारंपरिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘स्मार्ट और ग्रीन अर्बनाइजेशन’ की ओर कदम बढ़ा रहा है, जिससे आने वाले समय में यहां के युवाओं और अर्थव्यवस्था दोनों को संबल मिलेगा।



