कानपुर: मां के लिए इंसाफ मांगते ITBP जवान के समर्थन में पहुंचे कमांडेंट, सोशल मीडिया पर ‘घेराव’ के दावे का सच आया सामने
अस्पताल की कथित लापरवाही से कटा जवान की मां का हाथ; कमिश्नर ऑफिस पहुंचे ITBP अधिकारी, पुलिस ने गठित की संयुक्त जांच कमेटी।

24/05/2026-VIDYA SAGAR
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक बेहद भावुक और प्रशासनिक हलचल पैदा करने वाला मामला सामने आया है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के एक जवान विकास सिंह की मां के इलाज में हुई कथित मेडिकल लापरवाही को लेकर ITBP के उच्च अधिकारी और पुलिस प्रशासन आमने-सामने नजर आए। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं, जिसमें ‘कमांडोज द्वारा कमिश्नर ऑफिस को घेरने’ की बात कही जा रही है। आइए जानते हैं क्या है इस पूरे मामले की हकीकत।
क्या है पूरा मामला?
ITBP जवान विकास सिंह की 56 वर्षीय मां (निर्मला देवी) को सांस लेने में तकलीफ के कारण कानपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान डॉक्टरों की घोर लापरवाही या गलत इंजेक्शन के कारण महिला के दाहिने हाथ में गंभीर संक्रमण (Infection) फैल गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि डॉक्टरों को महिला की जान बचाने के लिए उनका दाहिना हाथ काटना पड़ा।
इस घटना से आहत और आक्रोशित जवान विकास सिंह अपनी मां के लिए न्याय की मांग को लेकर भटकता रहा। जब स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती रिपोर्ट से जवान संतुष्ट नहीं हुआ, तो वह बेहद भावुक स्थिति में अपनी मां का कटा हुआ हाथ एक आइस बॉक्स में लेकर सीधे पुलिस कमिश्नर दफ्तर पहुंच गया।
सोशल मीडिया पर ’50 कमांडोज के घेराव’ का सच
घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक खबर तेजी से वायरल हो गई कि “पुलिस की संवेदनहीनता पर भड़के ITBP कमांडेंट गौरव प्रसाद ने 50 कमांडोज के साथ कमिश्नर ऑफिस को घेर लिया।” हालांकि, आधिकारिक सूत्रों और खुद अधिकारियों ने इस ‘घेराव’ के दावे को पूरी तरह खारिज किया है। वास्तविकता यह है कि ITBP के कमांडेंट गौरव प्रसाद अपने जवान को मानसिक और कानूनी समर्थन देने के लिए पुलिस कमिश्नर से मिलने पहुंचे थे।
ITBP कमांडेंट गौरव प्रसाद ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा: > “हमने पुलिस कमिश्नर से जवान की मां की मेडिकल रिपोर्ट और मामले पर चर्चा करने के लिए पहले से अपॉइंटमेंट (समय) लिया था। मैं अधिकारियों के साथ अंदर शांतिपूर्ण बैठक कर रहा था, जबकि सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत हमारे जवान परिसर के बाहर खड़े थे। कमिश्नर ऑफिस को घेरने या बंधक बनाने जैसी बातें पूरी तरह भ्रामक और निराधार हैं। हमें स्थानीय प्रशासन का पूरा सहयोग मिल रहा है।”
प्रशासन का एक्शन: संयुक्त जांच कमेटी गठित
मामले की संवेदनशीलता और आईटीबीपी जवान के दर्द को देखते हुए कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने तुरंत कड़े कदम उठाए हैं। पुलिस कमिश्नर ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक संयुक्त जांच समिति (Joint Investigation Committee) का गठन किया है।
इस कमेटी में निम्नलिखित विभागों के विशेषज्ञ शामिल रहेंगे:
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के प्रतिनिधि और मेडिकल एक्सपर्ट्स।
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कानपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी।
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ITBP के अपने मेडिकल ऑफिसर्स।
यह कमेटी अस्पताल के रिकॉर्ड्स और डॉक्टरों के पैनल की दोबारा बारीकी से जांच करेगी ताकि यह साफ हो सके कि क्या वाकई यह मेडिकल लापरवाही का मामला है।
निष्कर्ष
यह घटना देश के जवानों के आपसी भाईचारे और एक-दूसरे के प्रति एकजुटता की एक बड़ी मिसाल है, जहाँ एक कमांडेंट अपने जवान की पीड़ा में उसके साथ खड़ा दिखाई दिया। हालांकि, कानून व्यवस्था को हाथ में लेने या किसी भी प्रकार के हिंसक घेराव के दावे पूरी तरह गलत हैं। अब देखना यह है कि संयुक्त जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद पीड़ित परिवार को कब तक न्याय मिलता है।



