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बिलासपुर में सनसनीखेज साइबर ठगी: ‘डिजिटल अरेस्ट’ का शिकार हुआ सेना का रिटायर्ड जवान, जालसाजों ने उड़ाए 98 लाख रुपये

खौफ के साए में 15 दिनों तक घर पर ही 'डिजिटल कस्टडी' में रहा पूर्व सैनिक; कानूनी कार्रवाई और जेल का डर दिखाकर ठगों ने खाली कर दिया बैंक खाता।

28/05/2026-VIDYA SAGAR

बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले से साइबर अपराध का एक बेहद हैरान और विचलित कर देने वाला मामला सामने आया है। देश की सुरक्षा में जीवन लगाने वाले भारतीय सेना के एक सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) सैनिक को शातिर साइबर ठगों ने अपना शिकार बनाया है। जालसाजों ने कानून और गिरफ्तारी का ऐसा खौफ पैदा किया कि पूर्व सैनिक को लगभग 15 दिनों तक उनके ही घर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ (डिजिटल कस्टडी) पर रखा और डरा-धमकाकर उनके जीवनभर की जमापूंजी से 98 लाख रुपये उड़ा लिए।


कैसे बुना गया ‘डिजिटल अरेस्ट’ का मायाजाल?

मिली जानकारी के अनुसार, ठगों ने खुद को जांच एजेंसियों (जैसे CBI, ED या पुलिस) का बड़ा अधिकारी बताकर पूर्व सैनिक से संपर्क किया। उन्होंने पीड़ित को डराया कि उनका नाम किसी बड़े वित्तीय घोटाले, मनी लॉन्ड्रिंग या किसी अवैध कूरियर पार्सल से जुड़ा है, जिसमें उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने वाला है।

15 दिनों तक चौबीसों घंटे रखी नज़र

ठगों ने पूर्व सैनिक को किसी से भी इस बारे में बात करने या फोन काटने पर तुरंत जेल भेजने की धमकी दी। स्काइप (Skype) या व्हाट्सएप (WhatsApp) वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को लगातार कैमरे के सामने रहने को मजबूर किया गया। इसी मानसिक दबाव और ‘डिजिटल कस्टडी’ का फायदा उठाकर ठगों ने ‘केस रफा-दफा करने’ और ‘खातों की जांच’ के नाम पर अलग-अलग किश्तों में कुल 98 लाख रुपये अपने फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए।


पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच में जुटी साइबर सेल

जब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ, तो उन्होंने बिलासपुर पुलिस और साइबर क्राइम सेल में इसकी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अज्ञात ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जिन बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर हुए हैं, उन्हें फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।


“क्या होता है डिजिटल अरेस्ट?” साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, या कूरियर कंपनी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं। वे पीड़ित पर किसी अपराध में शामिल होने का झूठा आरोप लगाते हैं और स्काइप या व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर लगातार बने रहने का दबाव डालते हैं। इसे ही ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा जाता है। देश का कोई भी कानून किसी को इस तरह डिजिटल हिरासत में लेने की इजाजत नहीं देता।


साइबर पुलिस की जनता से अपील: ऐसे रहें सुरक्षित

बिलासपुर पुलिस ने आम जनता को सचेत करते हुए कुछ बेहद जरूरी गाइडलाइंस जारी की हैं:

  • कोई भी एजेंसी फोन पर अरेस्ट नहीं करती: सीबीआई, पुलिस, कस्टम या ईडी जैसी कोई भी सरकारी एजेंसी कभी भी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार या ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती और न ही पैसों की मांग करती है।

  • डरे नहीं, तुरंत फोन काटें: यदि कोई आपको डराने की कोशिश करे, तो घबराने की बजाय तुरंत फोन काट दें और अपने परिजनों को सूचित करें।

  • हेल्पलाइन नंबर पर करें शिकायत: किसी भी प्रकार की साइबर ठगी का अंदेशा होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।


 

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