हिमाचल में सियासी घमासान: “धमकियों से भाजपा का कर्मचारी विरोधी चेहरा फिर हुआ बेनकाब” — सुक्खू सरकार के मंत्रियों का जयराम ठाकुर पर तीखा हमला
मंत्रियों अनिरुद्ध सिंह और राजेश धर्माणी का बड़ा बयान; कहा— मुकदमों पर फैसला अदालतें करती हैं राजनीतिक नेता नहीं, आंतरिक गुटबाजी से ध्यान भटका रही है भाजपा।

मुख्य समाचार
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शिमला।
हिमाचल प्रदेश में मुकदमों और प्रशासनिक अधिकारियों को लेकर छिड़ा सियासी विवाद अब और गहरा गया है। प्रदेश की सुक्खू सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों— ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह तथा तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने रविवार (28 जून, 2026) को एक साझा प्रेस वक्तव्य जारी कर विपक्ष पर तीखा हमला बोला है।
नेताओं ने नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर और भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं के हालिया बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा का कर्मचारी और अधिकारी विरोधी चरित्र एक बार फिर पूरी तरह सार्वजनिक हो चुका है।
“नेताओं के भाषणों से नहीं, अदालतों से तय होता है न्याय”
मंत्रियों ने सार्वजनिक मंचों से अधिकारियों को दी जा रही चेतावनियों पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की न्यायपालिका पूरी तरह स्वतंत्र है।
अदालतों का अधिकार:
किसी भी मामले में दर्ज एफआईआर (मुकदमे) सही हैं या गलत, इसका निर्णय केवल न्यायालयों को करना है, किसी राजनीतिक दल के नेताओं को नहीं।
तथ्यों की अहमियत:
किसी भी मुकदमे की वैधता राजनीतिक भाषणों से नहीं, बल्कि अदालतों में उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर तय होती है।
विपक्ष से तीखा सवाल:
मंत्रियों ने जय राम ठाकुर से सीधा सवाल पूछते हुए कहा, *”क्या भाजपा के शासनकाल में मुकदमे दर्ज नहीं होते थे? क्या उस समय कानून व्यवस्था की प्रक्रिया लागू नहीं होती थी? अगर तब कार्रवाई सही थी, तो आज गलत कैसे हो गई?”* उन्होंने इसे भाजपा की दोहरी मानसिकता और राजनीतिक अवसरवादिता करार दिया।
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आंतरिक गुटबाजी छिपाने की कोशिश: कांग्रेस
सुक्खू सरकार के मंत्रियों ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश भाजपा इस समय बेहद गंभीर आंतरिक कलह, असंतुष्टि और नेतृत्व संकट से जूझ रही है। पार्टी के भीतर बढ़ते आपसी संघर्ष और धड़ों की लड़ाई से जनता का ध्यान भटकाने के लिए ही भाजपा का शीर्ष नेतृत्व जानबूझकर नए प्रशासनिक विवाद खड़े कर रहा है और अधिकारियों-कर्मचारियों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
कर्मचारियों के अधिकारों और ओपीएस (OPS) पर घेरा
पेंशन और वित्तीय अधिकारों की अनदेखी का आरोप:
मंत्रियों ने याद दिलाया कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार को आरडीजी तथा जीएसटी क्षतिपूर्ति के रूप में केंद्र सरकार से लगभग 60 हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम वित्तीय सहायता मिली थी। इसके बावजूद उन्होंने कर्मचारियों को वेतन आयोग के एरियर तथा अन्य वित्तीय लाभों का भुगतान नहीं किया।
इसके विपरीत, वर्तमान कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही न केवल पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल कर ऐतिहासिक फैसला लिया, बल्कि वह पूरी तरह कर्मचारियों और अधिकारियों के हितों और उनकी गरिमा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।![]()
अधिकारियों को मिला निर्भीक होकर काम करने का भरोसा
प्रेस वक्तव्य के अंत में अनिरुद्ध सिंह और राजेश धर्माणी ने प्रदेश के सभी प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ मजबूती से खड़ी है। किसी भी अधिकारी को किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव या भय में काम करने की आवश्यकता नहीं है, सरकार उन्हें निष्पक्ष रूप से अपने वैधानिक दायित्व निभाने के लिए पूर्ण संरक्षण प्रदान करेगी।



