हिमाचल के फलों की मिठास से महका ओमान: ताजी चेरी और प्लम की पहली खेप का ऐतिहासिक निर्यात
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चमका हिमाचल; मुख्यमंत्री ने इसे बताया किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में मील का पत्थर

VIDYA SAGAR
शिमला, 02 जुलाई, 2026
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हिमाचल प्रदेश के बागवानी क्षेत्र ने एक नया इतिहास रच दिया है। प्रदेश की घाटियों में उगाई जाने वाली ताजी चेरी और प्लम की पहली खेप सफलतापूर्वक ओमान पहुंच गई है। इस ऐतिहासिक कदम से न केवल हिमाचल के फलों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक नई और मजबूत पहचान मिली है, बल्कि स्थानीय बागवानों को उनके उत्पादों का कहीं अधिक बेहतर और लाभकारी मूल्य मिलने का रास्ता भी साफ हो गया है।
ओमान के रिटेल स्टोर्स में दिखा हिमाचल का जलवा
हाल ही में प्रदेश के बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने 400 किलोग्राम ताजी चेरी और 400 किलोग्राम ताजे प्लम की इस विशेष खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
ओमान की राजधानी मस्कट पहुंचने पर भारतीय दूतावास ने इन फलों के लिए एक विशेष प्रचार अभियान (Promotional Campaign) शुरू किया। वहां के विभिन्न नामी खुदरा स्टोरों (रिटेल स्टोर्स) में इन फलों को बेहद आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया। मस्कट के स्थानीय लोगों और उपभोक्ताओं ने हिमाचल प्रदेश के फलों की उत्कृष्ट गुणवत्ता और लाजवाब स्वाद की जमकर सराहना की है और वहां से बेहद उत्साहजनक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं।

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किसानों के लिए समृद्धि के नए द्वार: मुख्यमंत्री सुक्खू
इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बागवानी विभाग तथा राज्य के सभी बागवानों को हार्दिक बधाई दी।
मुख्यमंत्री ने कहा, “बागवानों और विभाग की मेहनत तथा समर्पण के सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं। यह उपलब्धि राज्य के किसानों और बागवानों के लिए समृद्धि के नए अवसर लेकर आएगी और उन्हें उच्च मूल्य वाले वैश्विक बाजारों तक सीधी पहुंच प्रदान करेगी।”

निर्यात को सफल बनाने में इनकी रही अहम भूमिका
इस अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुचारू रूप से संपन्न करने में कई एजेंसियों का उत्कृष्ट समन्वय रहा:
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APEDA की भूमिका: कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के चंडीगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय ने पूरी प्रक्रिया की निगरानी की।
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सफल समन्वय: किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), सहकारी समितियों, निर्यातकों और एचपीएमसी (HPMC) के साथ मिलकर काम किया गया।
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अंतरराष्ट्रीय मानक: इस संयुक्त प्रयास से अंतरराष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता, ग्रेडिंग, शानदार पैकेजिंग और सख्त फाइटोसैनिटरी (Phytosanitary) मानकों का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित किया गया।
सरकार की भविष्य की योजनाएं और बागवानों से अपील
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने को वर्तमान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक बताया। उन्होंने प्रदेश के बागवानों से कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया:
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वैज्ञानिक खेती: उत्पादन और गुणवत्ता में वृद्धि के लिए वैज्ञानिक खेती की आधुनिक तकनीकों का उपयोग करें।
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उच्च गुणवत्ता: उच्च गुणवत्ता वाली पौध सामग्री अपनाएं और ग्रेडिंग पर विशेष ध्यान दें ताकि हिमाचल वैश्विक स्तर पर एक ‘विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता’ बन सके।

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मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार किसानों और बागवानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन, क्षमता विकास, बेहतर कृषि अवसंरचना (Infrastructure) और विपणन सहायता (Marketing Support) सहित हर संभव सहयोग लगातार प्रदान किया जाएगा। ओमान को हुए इस सफल निर्यात ने यह साबित कर दिया है कि भविष्य में हिमाचल के फलों के लिए विश्व के अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों के द्वार भी जल्द खुलेंगे।



