हिमाचल प्रदेश: PMAY-G के तहत अब अपात्रों का नाम हटाना हुआ और पारदर्शी, ग्रामीण विकास विभाग ने जारी किया ‘पोस्ट-डिलीशन मॉड्यूल’
10 जुलाई 2026 तक पूरी होगी प्रक्रिया; ग्राम सभाओं को मिलीं विशेष शक्तियां, AI तकनीक से होगा दस्तावेजों का सत्यापन।

VIDYA SAGAR
शिमला, 08 जुलाई 2026:
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हिमाचल प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत गरीबों को घर आवंटित करने की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्देशों पर राज्य के ग्रामीण विकास विभाग ने ‘आवास प्लस सिस्टम’ में एक नया ‘पोस्ट-डिलीशन मॉड्यूल’ (Post-Deletion Module) लॉन्च कर दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य स्थाई प्रतीक्षा सूची (Permanent Wait List) को बिना किसी गड़बड़ी के अंतिम रूप देना है।
ग्राम सभाओं को मिली बड़ी जिम्मेदारी, मनमानी पर लगेगी रोक
ग्रामीण विकास विभाग के प्रवक्ता ने इस नए सिस्टम की जानकारी देते हुए बताया कि सूची से अपात्र लोगों के नाम हटाए जाने (विलोपन प्रक्रिया) के बाद, अब ग्राम सभाओं को इस प्राथमिकता सूची की समीक्षा करने का पूरा अधिकार होगा।
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सत्यापन और संशोधन: ग्राम सभाएं अब लाभार्थियों के विवरण को खुद वेरिफाई कर सकेंगी और तय मापदंडों के आधार पर जरूरी बदलावों की सिफारिश कर सकेंगी।
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कारण बताना होगा अनिवार्य: सिस्टम में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अब किसी भी नाम को जोड़ने या हटाने पर उसका ठोस कारण सॉफ्टवेयर में दर्ज करना कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है। इससे अधिकारियों या स्थानीय स्तर पर होने वाली किसी भी मनमानी पर पूरी तरह रोक लगेगी।
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AI तकनीक और जियो-टैगिंग से लैस हुआ नया मॉड्यूल
इस नए डिजिटल मॉड्यूल में सुरक्षा और जवाबदेही के कड़े इंतजाम किए गए हैं:
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जियो-टैग्ड और टाइम-स्टैम्प्ड तस्वीरें: ग्राम सभा की बैठक के दौरान मौके की लाइव फोटो (स्थान और समय के साथ) अपलोड करनी होगी।
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ऑटो-जेनरेटेड ड्राफ्ट: बैठक की कार्यवाही का प्रारूप सिस्टम द्वारा खुद-ब-खुद (Autogenerated) तैयार होगा।
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AI आधारित सत्यापन: फर्जीवाड़े को रोकने के लिए पंचायती राज संस्थाओं के हस्ताक्षर, मुहर और सभी जरूरी दस्तावेजों का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए वेरिफिकेशन किया जाएगा।
अपात्रों की छंटनी से असंतुष्ट परिवारों को अपील का मौका
प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यदि ग्राम सभा द्वारा अंतिम रूप दी गई सूची में किसी पात्र परिवार का नाम छूट जाता है, तो उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे परिवार तय नियमों के अनुसार जिला स्तरीय अपीलीय समिति के पास अपनी शिकायत या अपील दर्ज करा सकते हैं। इन सभी अपीलों के निपटारे के बाद जो फाइनल लिस्ट बनेगी, उसी के आधार पर PMAY-G के तहत मकानों की स्वीकृति दी जाएगी।
10 जुलाई 2026 तक कार्य पूरा करने के सख्त निर्देश
ग्रामीण विकास निदेशालय ने राज्य के सभी उपायुक्तों (DCs), जिला विकास अधिकारियों (DDOs), खंड विकास अधिकारियों (BDOs) और पंचायती राज संस्थाओं को इस संबंध में मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का कड़ाई से पालन करने को कहा है। सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी ढंग से निपटाने के लिए 10 जुलाई 2026 तक की समयसीमा (Deadline) तय की है।



